वेतन में जीएसटी और सर्विस चार्ज कटौती से बीआरपी और सीआरपी कर्मचारियों के मायूसी, नियोक्ता द्वारा नहीं दी जा रही सेलरी स्लिप
शिक्षा विभाग में तीन माह पूर्व प्रदेश भर में बीआरपी और सीआरपी की नियुक्ति के बाद उनको वेतन देने में कटौती का खेल शुरू हो गया है। नियुक्ति पत्र में उन्हें 40 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिए जाने का उल्लेख किया गया। सितंबर माह में नियुक्ति के बाद करीब दो माह तक उन्हें मानदेय नहीं मिला। दिसंबर माह में जब मानदेय मिला तो अहसास हुआ कि करीब आधा सैलरी नियोक्ता ने बतौर जीएसटी और अन्य सर्विस चार्ज लगाकर काट दी है। अब उन्हें 40 हजार रुपये के ऐवज में प्रतिमाह मात्र 28800 रुपये का भुगतान हो रहा है।
इस संबंध में मामला विभागीय अधिकारियों के समक्ष शिकायत रखने पर वो आउटसोर्स के माध्यम से नियुक्ति की बात कहकर मजबूरी व्यक्त कर रहे है। शिक्षा विभाग में पूरे प्रदेश में नव नियुक्त करीब 950 बीआरपी और सीआरपी की है। समग्र शिक्षा अभियान के तहत प्रत्येक ब्लॉक में नियुक्त ब्लॉक रिसोर्स पर्सन (बीआरपी) और क्लस्टर रिसोर्स पर्सन (सीआरपी) की लंबे समय बाद हुई नियुक्ति से शिक्षा विभाग को कुछ राहत मिली है। लेकिन नियुक्ति पत्र में अंकित सैलरी के एक मोटी रकम की कटौती से नाराजगी व्याप्त हो रही है।
उधर विभागीय अधिकारियों का कहना है कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत बीआरपी, सीआरपी की नियुक्ति सीधे शिक्षा विभाग से किए जाने के बजाय दिल्ली के गैर सरकारी संगठन के माध्यम से की गई है। सरकार प्रति बीआरपी, सीआरपी इस संगठन को 40 हजार रुपये प्रतिमाह का भुगतान करती है। एनजीओ उसमे से प्रत्येक के मानदेय से 18 प्रतिशत की दर से प्रति माह 7200 रुपये बतौर जीएसटी काट रहा है। इसके अलावा अन्य सर्विस चार्ज भी इन कर्मियों से वसूले जा रहे हैं।सैलरी स्लिप नहीं दी गई है। जिससे उन्हें जीएसटी के अलावा अपने वेतन में से काटे जा रहे अन्य सर्विस चार्ज की जानकारी नहीं मिल रही है। नाम नहीं छापने की शर्त पर कई नव नियुक्त बीआरपी ने बताया कि नियोक्ता एजेंसी के किसी अधिकारी से उनका सीधा संपर्क नहीं होता है और न ही एजेंसी के आधिकारिक कार्यालय की उन्हें जानकारी मिल रही है।


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