ॐ नमः शिवाय। सूर्यास्त के समय आसमान में सूर्यदेव ने बादलों के साथ अठखेलियाँ करते हुए करवाये भगवान भोलेनाथ के दर्शन। इसे संयोग कहें या कुछ और, किन्तु पलभर के लिए सूर्यदेव ने बादलों की ओट में जाकर भोलेनाथ के हमे दर्शन करवा दिए। बादलों के पीछे जैसे ही सूर्यदेव छिपने लगे वैसे ही सूर्यास्त के समय सुनहरे बादलों ने भोले शंकर की आकृति बना ली। नजारे को कैमरे में उतारने में पलभर की देर हुई वरना भोलेनाथ के साथ ही उनके त्रिशूल, डमरू, जटा से निकलती भागीरथी गंगा की धारा और नंदी को भी आपके सामने इस फोटो में प्रस्तुत कर पाता। फोटो ऋषिकेश से देहरादून की ओर आते हुए जौलीग्रांट एयरपोर्ट के पास कार से ली गयी है। जय भोलेनाथ।
भारतीय संस्कृति में प्रार्थना का अहम स्थान हैं। प्रत्येक कार्य के आरंभ में ईश्वर से उस कार्य की सिद्धि हेतु हम सभी प्रार्थना करते हैं। प्रार्थना के बाद ही सभी कार्य आरंभ किये जाते हैं. बच्चें भी जब विद्या अध्ययन के लिए विद्यालय जाते है तो पठन पाठन से पूर्व वे प्रार्थना सभा में ईश्वर से प्रार्थना करते हैं। प्रार्थना से मन व ह्रदय को मजबूती तो मिलती ही है साथ ही यह संसार के रचयिता परम शक्ति सम्पन्न ईश्वर को धन्यवाद अर्पित कर कृतज्ञता प्रकट करने का भी एक माध्यम है। ईश्वर की प्रार्थना से ही मन स्थिर होता है। जिसके कारण बच्चे पढाई मे ज्यादा ध्यान लगा पाते है। सुबह की प्रर्थना आपके पूरे दिन को सकारत्मक बनाती है, ऐसा माना जाता है कि प्रार्थना किसी ‘महान शक्ति’ से सम्बन्ध जोड़ने का एक उचित माध्यम है। इस लेख मे हम भारत के अधिकांश विद्यालयो मे आयोजित होने वाली इन 20 प्रार्थनाओं पर नजर डालेंगे। स्कूलों के लिए प्रर्थना का यह संकलन आपको कैसा लगा, कृपया कमेंट बॉक्स में अपने सुझाव अवश्य कमेंट करें।


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