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Showing posts from September, 2020

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सूर्यास्त के समय सूर्यदेव ने बादलों की ओट में छिपकर कराए सुनहरे बादलों में भोलेनाथ के दर्शन।

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ॐ नमः शिवाय। सूर्यास्त के समय आसमान में सूर्यदेव ने बादलों के साथ अठखेलियाँ करते हुए करवाये भगवान भोलेनाथ के दर्शन। इसे संयोग कहें या कुछ और, किन्तु पलभर के लिए सूर्यदेव ने बादलों की ओट में जाकर भोलेनाथ के हमे दर्शन करवा दिए। बादलों के पीछे जैसे ही सूर्यदेव छिपने लगे वैसे ही सूर्यास्त के समय सुनहरे बादलों ने भोले शंकर की आकृति बना ली। नजारे को कैमरे में उतारने में पलभर की देर हुई वरना भोलेनाथ के साथ ही उनके त्रिशूल, डमरू, जटा से निकलती भागीरथी गंगा की धारा और नंदी को भी आपके सामने इस फोटो में प्रस्तुत कर पाता। फोटो ऋषिकेश से देहरादून की ओर आते हुए जौलीग्रांट एयरपोर्ट के पास कार से ली गयी है। जय भोलेनाथ।

मांग का अर्थ, परिभाषा, मांग तालिका, मांग के प्रकार और मांग वक्र।

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    सुशील डोभाल  प्रिय विद्यार्थियों, कोरोना के इस चुनौती भरे समय मे स्कूल कॉलेज बंद रहने के कारण आप सभी की पढ़ाई बुरी तरह से प्रभावित हुई है। हमारी सरकारें, विद्यलयी शिक्षा विभाग, विद्यालय प्रशासन, विभागीय अधिकारी और सभी शिक्षक आपकी शिक्षा दीक्षा को लेकर चिंतित हैं और विभिन्न माध्यमो से आप तक शैक्षिक सामग्री पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है साथ ही ऑनलाइन माध्यम से आपको विषयगत लाभ देने का प्रयास किया जा रहा है। आप मे से अनेक विद्यार्थी इन सुविधाओं का अच्छा लाभ ले रहे हैं किंतु कुछ छात्र-छात्राओं और अभिभावकों की उदासीनता चिंतनीय है। कक्षा 11 व 12 के अर्थशास्त्र विषय के विद्यार्थियों के लिए मैं समय समय पर "हिमवंत" के माध्यम से शैक्षिक सामग्री और नोट्स प्रस्तुत करता रहा हूँ, इसी क्रम में आज आपके लिए अर्थशास्त्र विषय मे "मांग का अर्थ, परिभाषा, प्रकार और मांग वक्र" को विस्तार से प्रस्तुत कर रहा हूँ। आशा है मेरा यह प्रयास आपके लिए उपयोगी सावित होगा।        मांग (Demand) एवं   पूर्ति (Supply)   अर्थशास्त्र में दो महत्वपूर्ण घटक होते हैं। हमारी अर्थव्यवस्था में कुछ

SCERT उत्तराखण्ड द्वारा आयोजित "स्वयं प्रभा" कार्यक्रम का 'हिमवंत' पर लें सरल ढंग से ऑनलाइन प्रशिक्षण.

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   समस्त शिक्षक साथियों को मेरा नमस्कार. साथियों कोविड- 19  के कारण देशभर के स्कूल कॉलेज बंद है और कक्षा कक्षों में शिक्षण फ़िलहाल नहीं हो पा रहा है. मार्च से लेकर अभी तक स्कूलों के बंद रहने से विद्यार्थियों को जो शैक्षिक क्षति हुयी है उसकी भरपाई करना बेहद कठिन कार्य है. यथासंभव सभी शिक्षक विभिन्न माध्यमों से ऑनलाइन शिक्षण के द्वारा अपने विद्यार्थियों को लाभंविंत करने का प्रयास कर रहे है ,  लेकिन इंटरनेट कनेक्टिविटी और स्मार्टफोन आदि सुविधाओं के पहुँच सभी छात्र-छात्राओं तक न हो पाने और तकनिकी जानकारी के अभाव में यह कार्य अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर पा रहा है. कक्षा शिक्षण का विकल्प ऑनलाइन शिक्षण नहीं हो सकता ,  किन्तु हमारे सम्मुख आज जो परिस्थितियां खड़ी है उनको ध्यान में रखते हुए कोरोनाकाल में ऑनलाइन शिक्षण ,  टेलीविजन और रेडियों जैसे संचार माध्द्वायमों द्वारा शिक्षण बेहतरीन विकल्प सवित हो सकते हैं. इन्ही बातों को ध्यान में रखते हुए एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखण्ड द्वारा शैक्षिक कार्यक्रमों के प्रसारण के लिए प्रसिद्द "स्वयं प्रभा चैनल" के प्रयोग हेतु राज्यभर के शिक्षकों के लि

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