Friday, September 11, 2020

सूर्यास्त के समय सूर्यदेव ने बादलों की ओट में छिपकर कराए सुनहरे बादलों में भोलेनाथ के दर्शन।

ॐ नमः शिवाय। सूर्यास्त के समय आसमान में सूर्यदेव ने बादलों के साथ अठखेलियाँ करते हुए करवाये भगवान भोलेनाथ के दर्शन। इसे संयोग कहें या कुछ और, किन्तु पलभर के लिए सूर्यदेव ने बादलों की ओट में जाकर भोलेनाथ के हमे दर्शन करवा दिए। बादलों के पीछे जैसे ही सूर्यदेव छिपने लगे वैसे ही सूर्यास्त के समय सुनहरे बादलों ने भोले शंकर की आकृति बना ली। नजारे को कैमरे में उतारने में पलभर की देर हुई वरना भोलेनाथ के साथ ही उनके त्रिशूल, डमरू, जटा से निकलती भागीरथी गंगा की धारा और नंदी को भी आपके सामने इस फोटो में प्रस्तुत कर पाता। फोटो ऋषिकेश से देहरादून की ओर आते हुए जौलीग्रांट एयरपोर्ट के पास कार से ली गयी है। जय भोलेनाथ।

Wednesday, September 9, 2020

मांग का अर्थ, परिभाषा, मांग तालिका, मांग के प्रकार और मांग वक्र।

   
सुशील डोभाल
 प्रिय विद्यार्थियों, कोरोना के इस चुनौती भरे समय मे स्कूल कॉलेज बंद रहने के कारण आप सभी की पढ़ाई बुरी तरह से प्रभावित हुई है। हमारी सरकारें, विद्यलयी शिक्षा विभाग, विद्यालय प्रशासन, विभागीय अधिकारी और सभी शिक्षक आपकी शिक्षा दीक्षा को लेकर चिंतित हैं और विभिन्न माध्यमो से आप तक शैक्षिक सामग्री पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है साथ ही ऑनलाइन माध्यम से आपको विषयगत लाभ देने का प्रयास किया जा रहा है। आप मे से अनेक विद्यार्थी इन सुविधाओं का अच्छा लाभ ले रहे हैं किंतु कुछ छात्र-छात्राओं और अभिभावकों की उदासीनता चिंतनीय है। कक्षा 11 व 12 के अर्थशास्त्र विषय के विद्यार्थियों के लिए मैं समय समय पर "हिमवंत" के माध्यम से शैक्षिक सामग्री और नोट्स प्रस्तुत करता रहा हूँ, इसी क्रम में आज आपके लिए अर्थशास्त्र विषय मे "मांग का अर्थ, परिभाषा, प्रकार और मांग वक्र" को विस्तार से प्रस्तुत कर रहा हूँ। आशा है मेरा यह प्रयास आपके लिए उपयोगी सावित होगा।
       मांग (Demand) एवं पूर्ति (Supply) अर्थशास्त्र में दो महत्वपूर्ण घटक होते हैं। हमारी अर्थव्यवस्था में कुछ वस्तुएं महँगी होती हैं एवं कुछ सस्ती होती हैं। कुछ बहुत कम मात्र में होती हैं एवं कुछ बहुत बड़ी मात्र में उपलब्ध होती हैं। हम जब खरीदते हैं तो कुछ चीज़ें सस्ती होती हैं तो कुछ महँगी। इनके भाव बदलते रहते हैं। ये मुख्यतः इनकी मांग एवं आपूर्ति के कारण होता है।

मांग क्या होती है ?

सामान्यतः मांग का अर्थ किसी चीज़ को पाने की चाह माना जाता है लेकिन अर्थशास्त्र में यह भिन्न है। इसमें मांग में पाने की चाह के साथ साथ इसका मूल्य एवं इसका माप भी होता है। जैसे: आपको 5 रूपए प्रति पेंसिल के हिसाब से 10 पेंसिल चाहिए। यह मांग मानी जायेगी।

परिभाषा (Definition of demand)

प्रोफेसर मेयर्स के अनुसार “क्रेता की मांग उन सभी मात्राओं की तालिका होती है जिन्हें वह उस सामग्री के विभिन्न संभावित मूल्यों पर खरीदने के लिए तैयार रहता है।”

मांग के ज़रूरी अवयव :

कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो यदि ना हो तो मांग केवल चाह बनके रह जाती है उसे हम मांग नहीं कह सकते हैं। अतः मांग कहलाने के लिए जिन तत्वों का होना ज़रूरी है वे निम्न हैं :

  1. पाने की इच्छा : किसी चाह को मांग उपभोक्ता की इच्छा का होना होता है। यदि वह उपभोक्ता किसी वस्तु को पाने की इच्छा नहीं रखता है तो हम इसे मांग नहीं कह सकते हैं।
2. खरीदने की क्षमता : यदि कोई उपभोक्ता कोई चीज़ खरीदने की इच्छा रखता है तो उसके साथ ही उसके पास उस वस्तु को खरीदने की क्षमता भी होनी चाहिए अन्यथा वह मांग नहीं कहलाएगी। खरीदने का कोई साधन का होना आवश्यक है।
3. खर्च करने की तत्परता : किसी उपभोक्ता के पास चाह हो सकती है, साधन हो सकता है लेकिन यदि उसके पास खर्च करने की तत्परता नहीं है तो वह उसे खरीद नहीं पायेगा।
4. निश्चित मूल्य : इन सभी तत्वों के साथ साथ एक वस्तु की मांग को बताने के लिए उसके साथ निश्चित मूल्य भी बताना  होता है। जैसे हमें 2 किलो चीनी चाहिए तो हम बोलेंगे की 30 रूपए प्रति किलो के हिसाब से 2 किलो चीनी चाहिए।
5. निश्चित समय : ऊपर सभी तत्वों के साथ साथ एक निश्चित समय का भी होना ज़रूरी होता है। जैसे अभी उपभोक्ता को निश्चित वास्तु निश्चित समय में चाहिए बाद में उसकी कुछ और पाने की चाह हो जायेगी। अतः निश्चित समय का भी ज्ञात होना ज़रूरी होता है।

मांग तालिका (Demand Table)

मांग तालिका एक या एक से ज्यादा उपभोक्ताओं द्वारा निश्चित समय में किसी वस्तु के विभिन्न संभावित मूल्यों पर की गयी मांग की मात्रा के बारे में बताती है। यह मुख्यतः सो प्रकार की होती है :
  1. व्यक्तिगत मांग तालिका
  2. बाज़ार मांग तालिका

1. व्यक्तिगत मांग तालिका :

एक व्यक्तिगत मांग तालिका में केवल किसी एक विशेष व्यक्ति द्वारा निश्चित समय में की गयी वस्तु के विभिन्न संभावित मूल्यों पर मांग की मात्राओं की सूचि होती है। जब हम इस तालिका को बनाते हैं तो इसमें बायीं तरफ हम वस्तु के विभिन्न मूल्य लिखते हैं एवं दायीं तरफ हम उपभोक्ता द्वारा की गयी मांग लिखते है।

ऊपर दी गयी तालिका में जैसा की आप देख सकते हैं एक तरफ विभिन्न मूल्य दिए गए हैं एवं वहीं दूसरी तरफ मांग की विभिन्न मात्राएँ दी गयी हैं। आप यह भी देख सकते हिं की शुरुआत में संतरे का मूल्य केवल एक रूपए प्रति इकाई था तब इसकी 90 इकाइयों की मांग थी लेकिन धीरे धीरे यह मूल्य बढ़ा जिसके साथ यह मांग कम होती चली गयी।
जब इसका मूल्य 5 रूपए प्रति इकाई पर पहुंचा तब इसकी मांग केवल 50 इकाइयों तक सीमित रह गयी थी। इससे हमें पता चलता है की एक वस्तु के मूल्य एवं उसकी मांग में विपरीत सम्बन्ध होता है।

2. बाज़ार मांग तालिका :

एक बाज़ार मांग तालिका में किसी एक विशेष व्यक्ति का नहीं बल्कि एक निश्चित समय अवधि में वस्तु की विभिन्न कीमतों पर उनके सभी खरीददारों द्वारा वस्तु की माँगी गयी मात्राओं के कुल योग की सूचि होती है। जैसे मान लेते हैं की बाज़ार में केवल तीन खरीददार हैं। तो जो उन तीनों खरीददारों की विभिन्न संभावित मूल्यों पर मांग का योग होगा वही बाज़ार की मांग होगी। यह मांग ही बाज़ार की मांग होगी।
तालिका

जैसा की आप ऊपर दी गयी तालिका में देख सकते हैं हमें बाज़ार में केवल तीन ग्राहक दे रखे हैं अर्थात बार में केवल तीन ही खरीददार हैं। जो इन तीनों खरीददारों की मांग का योग होगा जो सबसे दायीं तरफ दे रखा है वही बाज़ार की मांग होगी। यहाँ भी जैसा आप देख सकते हिं बढ़ते मूल्य के साथ बाज़ार की मांग भी कम हो रही है।

मांग वक्र (Demand Curve in hindi)

मांग की तालिका का रेखाचित्र रूप ही मांग वक्र कहलाता है। जब हम मांग की मात्राओं को रेखाचित्र के रूप में प्रस्तुत करते हैं तो हमें एक वक्र प्राप्त होता है जिसे मांग वक्र कहा जाता है। निचे दिए गए रेखाचित्र में देखें :

जैसा की आप देख सकते हिं हमने संतरे के मूल्य एवं मांग को रेखाचित्र पर अंकित किया है। x अक्ष पर मूल्य है एवं y अक्ष पर उसकी मांग है। यहाँ आप देख सकते हैं पांच विभिन्न बिन्दुओं को अंकित किया गया है वे बता रहे हैं की इतने मूल्य पर इतनी मांग है।
जैसा की आप देख सकते हैं की जैसे जैसे मूल्य बढ़ रहा है वैसे वैसे इसकी माग कम हो रही है। यह मूल्य एवं मांग के बीच विपरीत सम्बन्ध को दर्शाता है।

मांग निर्धारित करने वाले तत्व (Factors affecting demand)

कुछ ऐसे घटक होते है जिनके कम या ज्याद होने से मांग की मात्र में भी फरक पड़ता है। आइये जानते हैं ऐसे कौन कौन से घटक है :
1. वस्तु की कीमत : यह घटक मांग पर प्रभाव डालने वाले घटकों में से सबसे महत्वपूर्ण है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वस्तु की कीमत में परिवर्तन के परिणामस्वरूप उसकी माँग भी परिवर्तित हो जाती है। एक वस्तु के मूल्य में एवं उसकी मांग में विपरीत सम्बन्ध होता है। मूल्य के बढ़ने पर वस्तु की मांग स्वतः ही घाट जाती है एवं घटने पर मांग बढ़ जाती है।

अन्य तत्व :

2. सम्बंधित वस्तुओं की कीमत :  एक निश्चित वस्तु की दो तरह की सम्बंधित वस्तुएं होती है। वैकल्पिक वस्तु एवं सहायक वस्तु।
  • वैकल्पिक वस्तु वह होती है जो एक मुख्या वास्तु की जगह पर प्रयोग की जा सकती है। जैसे कोका कोला एवं पेप्सी एक दुसरे के स्थान पर प्रयोग किये जा सकते हैं। यदि वैकल्पिक वस्तुओं की मांग बढ़ती हैं तो मुख्य वस्तु की मांग कम हो जाती है। इससे हम यह जान सकते हैं की वैकल्पिक वस्तु एवं मुख्य वस्तु की मांग में विपरीत सम्बन्ध होता है।
  • पूरक वस्तु वे होती हैं जिन्हे मुख्य वस्तु के साथ प्रयोग किया जाता है। जैसे ब्रेड के साथ बटर हैं। यदि ब्रेड की मांग बढ़ती है तो उसके साथ खाने के लिए बटर की मांग भी बढ़ेगी। इससे हम यह जान सकते हैं की पूरक वस्तु एवं मुख्य वस्तु की मांग में सीधा सम्बन्ध होता है।
3. उपभोक्ता की आय : किसी भी व्यक्ति की आय के अनुसार मांग में भी इजाफा होता है। यदि किसी व्यक्ति की आय अधिक है तो जाहिर सी बात है की उसके द्वारा किसी भी वस्तु या सेवा को खरीदने में किसी भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। अर्थात धनी ग्राहक मांग के नियम को सकारात्मक तरीके से प्रभावित करते हैं।
4. ग्राहक की पसंद : यह घटक भी किसी वस्तु की मांग को प्रभावित करता है। यदि और वस्तु की तुलना में ग्राहक की एक वस्तु में ज्यादा रूचि होती है तो उस वस्तु की मांग में इजाफा होता है। अतः यह घटक भी ज़िम्मेदार होता है।
5. भविष्य की आस : भविष्य में यदि व्यक्ति को ऐसा लगता ह की कीमतों में या उसकी आय में बदलाव होगा तो इससे वर्तमान की मांग में प्रभाव पड़ेगा।
  1. भविष्य की कीमत- किसी भी वस्तु की मांग में इजाफा तब होता है जब किसी ग्राहक को इस बात का अंदाजा हो जाता हैं की अमुक वस्तु की कीमत भविष्य में बढ़ेगी। साथ ही यदि किसी वस्तु की कीमत के भविष्य में घटने की उम्मीद होती है तो उसकी मांग में भी कमी होती है।
  2. भविष्य की आय-  किसी भी वस्तु की मांग में इजाफा तब होता है जब किसी ग्राहक को इस बात का अंदाजा हो जाता हैं कि उसकी आय में भविष्य में वृद्धि होगी। साथ ही यदि इस बात का अंदाजा हो जाये कि ग्राहक की आय भविष्य में घटेगी तो उसकी मांग में भी कमी होती है।
6. धन का वितरण : विभिन्न लोगो के बीच धन का किस प्रकार वितरण किया गया है यह भी वस्तुओं की मांग  पर प्रभाव डालता है। जैसे यदि धन का वितरण असमान है एवं अमीरों के पास ज्यादा धन है तो लक्ज़री वस्तु की मांग ज्यादा होगी लेकिन यदि वितरण समान है तो आवश्यक वस्तुओं की ज्यादा मांग होगी।

मांग वक्र में परिवर्तन (Change in Demand Curve)

मांग वक्र में दो तरह से परिवर्तन होते हैं:
  1. मांग वृद्धि होना (अन्य तत्वों में परिवर्तन की वजह से)
  2. मांग में कमी होना,(अन्य तत्वों में परिवर्तन की वजह से)
  3. मांग का विस्तार होना (स्वयं के मूल्य में परिवर्तन की वजह से)
  4. मांग का संकुचन होना (स्वयं के मूल्य में परिवर्तन की वजह से)

1. मांग में वृद्धि होना :

जब किसी वस्तु का मूल्य नहीं बदले लेकिन किन्हीं दुसरे तत्वों में बदलाव आने की वजह से उसकी मांग बढ़ जाए तो उसे मांग में वृद्धि होना बोलते हैं। जब मांग में वृद्धि होती है तो मांग वक्र दायीं ओर खिसक जाता है।
मांग में वृद्धि होना
जैसा की आप ऊपर दिए गए चित्र में देख सकते हैं यहाँ वस्तु का मूल्य समान है लेकिन किन्हीं अन्य तत्वों में बदलाव आने की वजाह से इसकी मांग 80 इकाइयों से बढ़ कर 115 इकाई हो गयी है। इसके साथ ही मांग वक्र D से थोडा खिसक कर D2 पर आ गया है। मांग में वृद्धि होने का वक्र पर यह असर होता है।

कारण :

  • उपभोक्ता की आय में वृद्धि होना
  • पूरक वस्तु के मूल्य में गिरावट
  • वैकल्पिक वस्तु का मूल्य बढ़ना
  • भविष्य में कीमत बढ़ने की आस होना

2. मांग में कमी आना :

जब किसी वस्तु के स्वयं के मूल्य में परिवर्तन ना आये लेकिन अन्य घटकों में परिवर्तन आने की वजह से मांग में कमी आ जाए तो सी परिवर्तन को मांग में कमी आना बोलते हैं। इसमें वस्तु के मूल्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है लेकिन इसकी मांग कम हो जाती है। ऐसा होने पर वक्र बायीं और खिसक जाता है।
मांग में कमी आना
ऊपर दिए गए उदाहरण में जैसा की आप देख सकते हैं  यहाँ एक वस्तु के मूल्य में कोई परिवर्तन नहीं हो रहा है लेकिन किन्हीं अन्य घटकों में परिवर्तन होने की वजह से इसकी मांग में कमी आ रही है। ऐसा होने से मांग वक्र खिसक कर D से D2 तक आ जाता है। अतः मांग में कमी आने का वक्र में यह प्रभाव पड़ता है।

कारण :

  • उपभोक्ता की आय में कमी होना
  • पूरक वस्तु के मूल्य में बढ़ोत्तरी
  • वैकल्पिक वस्तु के मूल्य में गिरावट
  • भविष्य में कीमत कम होने की आस होना

3. मांग का विस्तार होना :

ऐसी स्थिति जब वस्तु के अन्य सभी तत्वों में कोई परिवर्तन ना आये लेकिन स्वयं के मूल्य में कमी आ जाने से मांग में बढ़ोतरी हो जाए तो इसे मांग का विस्तार होना बोलते हैं। ऐसा होने पर वक्र अपनी जगह से नहीं हिलता लेकिन मांग में बढ़ोतरी देखि जा सकती है।
अंग का विस्तार होना
ऊपर दिए गए चित्र में जैसा की आप आप देख सकते हैं यहाँ मूल्य 16 रूपए से 12 रूपए पर गिर गया है जिसके कारण मांग 60 इकाई से 80 इकाइयों तक बढ़ गयी है। यहाँ हम देख सकते हैं की मांग के बढ़ने से वक्र अपनी जगह से नहीं हिला है लेकिन वर्तमान मांग में बदलाव आया है। इसकी वजह से इस वस्तु की वर्तमान मांग A बिंदु से हटकर B बिंदु पर बन गयी है। अतः मांग में विस्तार होने से वक्र पर यह असर पड़ता है।

4. मांग में संकुचन होना :

ऐसी स्थिति तब होती है जब किसी वस्तु के मांग के अन्य तत्वों में कोई बदलाव नहीं होता है लेकिन इसके मूल्य में बढ़ोतरी होने से मांग में गिरावट आ जाती है। ऐसी स्थिति को मांग में संकुचन आना कहते हैं। ऐसा होने पर वक्र पानी जगह से नहीं हिलता है बस मांग की मात्र में कमी आ जाती है जिससे वह बायीं और की तरफ आती है एवं मूल्य ऊपर की और बढ़ता है।
मांग का संकुचन होना
जैसा की आप ऊपर दिए गए चित्र में देख सकते हैं यहाँ वस्तु का मूल्य 12 रूपए से बढ़कर 16 रूपए हो गया है जिसके फलस्वरूप मांग 80 इकाइयों से 60 इकाइयों पर आ गयी है। इससे वर्तमान मांग A बिंदु से हटकर B बिंदु पर बन गयी है। ऐसा होने से मांग वक्र की जगह में कोई बदलाव नहीं आया है। अतः मांग में संकुचन आने से वक्र पर यह असर पड़ता है।

मांग का नियम (Law of demand)

मांग के नियम के अनुसार वस्तु की कीमत एवं इसकी मांगी गयी मात्रा में विपरीत संबंध होता है।
विभिन्न तालिकाओं में हम देख चुके हैं की जैसे जैसे मूल्य काम होता है तो उपभोक्ता किसी वस्तु की ज़्यादा मांग करता है लेकिन यदि उसकी कीमत में इजाफा होता है तो फिर वह उस वस्तु की मांग भी कम कर देता है। इससे इस नियम की भी पुष्टि होती है।
मांग के नियम का चित्र

मांग के नियम का चित्रित रूप

ऊपर दिए गए चित्र में जैसा की आप देख सकते हैं यहां Y अक्ष पर किसी निश्चित वस्तु की कीमत दी हुई है एवं X अक्ष पर उसकी उपभोक्ता द्वारा मांग दी हुई है। इस चित्र में साफ देखा एवं समझा जा सकता है। हम A बिंदु पर देख सकते हैं की यहाँ वस्तु की कीमत उच्चतम है लेकिन इसके साथ ही इसकी मांग इसके विपरीत न्यूनतम है। जैसे जैसे हम इस रेखा में निचे चलते जाते हैं तो हम आखिरी में E बिंदु पर आते हैं जहां यह देखा जा सकता है की वस्तु की कीमत न्यूनतम है लेकिन इसके विपरीत इसकी उपभोक्ताओं द्वारा मांग उच्चतम है।

मांग के नियम के अपवाद के कुछ उदाहरण :

कुछ ऐसी परिस्थितियाँ होती हैं जब मांग के रेखाचित्र में मांग वक्र नियम के अनुसार नहीं होता। वह नीचे जाने के बजाय ऊपर की ओर उठता है। हम अभी जानेंगे की ऐसी कौन-कौन सी परिस्थितियाँ है जब ऐसा होता है :
1बुनियादी ज़रुरत की वस्तुएं : ये कुछ ऐसी वस्तुएं होती हैं जिनका उपभोग अति आवश्यक होता है जैसे आता, चावल दाल आदि। इन वस्तुओं का उपभोग व्यक्ति नित्य प्रति करता है। यदि इनका मूल्य बढ़ भी जाए फिर भी कोई इनका उपभोग करना छोड़ेगा नहीं। अतः यह मांग के नियम के अपवाद की स्थिति बन जाती है जब कीमतों के बढ़ने पर मांग में कोई कमी देखने को नहीं मिलती है।
2. विलासिता की वस्तुएं : हीरे, सोने चांदी के जवाहरात आदि कुछ ऐसी वस्तुएं होती हैं जिसे ऊंची प्रतिष्ठा वाले लोग ज़्यादा खरीदते हैं। यह मुख्यतः दिखावे के लिए प्रयोग किये जाते हैं। इन वस्तुओं की कीमत यदि बढ़ जाए तो लोग इसे खरीदना नहीं छोड़ेंगे क्योंकि धनवान लोगों के पास पैसे की कोई कमी नहीं होती एवं वे ही ऐसी वस्तुओं के मुख्या उपभोक्ता होते हैं। अतः यह भी मांग के नियम के अपवाद की स्थिति बन जाती है जब वक्र बढ़ती कीमतों के बावजूद नीचे की ओर नहीं जाता है।
3. दुर्लभ वस्तुएं : दुनिया में कई ऐसी चीज़ें होती है जोकि मांग के अनुरूप उपलब्ध नहीं होती हैं। इनकी मात्रा बहुत सीमित होती है। जैसे दुर्लभ पत्थर जोकि धरती के नीचे पाए जाते है। ये कभी कभी खोजे जाते हैं एवं बहुत ज्यादा मेहेंगे होते हैं। इतनी अधिक कीमतों के बावजूद भी लोग अपने शौक को पूरा करने के लिए खरीदते हैं। अतः ये वस्तुएं भी मांग के नियम के अनुरूप काम नहीं करती हैं।
4. गिफिन वस्तुएं : गिफ़िन वस्तुएंऐसी विशेष प्रकार की सुलभ वस्तुएं होती हैं जिनका यदि मूल्य काम कर दिया जाए तो इसकी मांग भी काम हो जायेगी एवं यदि इनका मूल्य बढ़ा दिया जाए तो इनकी मांग भी बढ़ जायेगी। हम बाजरे का उदाहरण लेते हैं जब किसी व्यक्ति की आय कम हो जाती है तो वह गेहूं के मुकाबले बाजरा ज्यादा उपभोग करेगा क्योंकि यह सस्ता है एवम इससे बाजरे की मांग बढ़ जाती है। लेकिन यदि उसकी आय बढ़ जाती है तो वह बाजरे के मुकाबले गेहूं लेना पसंद करेगा जिससे बाजरे की मांग कम हो जायेगी। यह मांग के नियम के अपवाद की स्थिति बना देता है।
साभार- द इंडियन वायर
आप अपने सवाल एवं सुझाव नीचे कमेंट बॉक्स में व्यक्त कर सकते हैं।


Friday, September 4, 2020

SCERT उत्तराखण्ड द्वारा आयोजित "स्वयं प्रभा" कार्यक्रम का 'हिमवंत' पर लें सरल ढंग से ऑनलाइन प्रशिक्षण.


   समस्त शिक्षक साथियों को मेरा नमस्कार. साथियों कोविड-19 के कारण देशभर के स्कूल कॉलेज बंद है और कक्षा कक्षों में शिक्षण फ़िलहाल नहीं हो पा रहा है. मार्च से लेकर अभी तक स्कूलों के बंद रहने से विद्यार्थियों को जो शैक्षिक क्षति हुयी है उसकी भरपाई करना बेहद कठिन कार्य है. यथासंभव सभी शिक्षक विभिन्न माध्यमों से ऑनलाइन शिक्षण के द्वारा अपने विद्यार्थियों को लाभंविंत करने का प्रयास कर रहे हैलेकिन इंटरनेट कनेक्टिविटी और स्मार्टफोन आदि सुविधाओं के पहुँच सभी छात्र-छात्राओं तक न हो पाने और तकनिकी जानकारी के अभाव में यह कार्य अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर पा रहा है. कक्षा शिक्षण का विकल्प ऑनलाइन शिक्षण नहीं हो सकताकिन्तु हमारे सम्मुख आज जो परिस्थितियां खड़ी है उनको ध्यान में रखते हुए कोरोनाकाल में ऑनलाइन शिक्षणटेलीविजन और रेडियों जैसे संचार माध्द्वायमों द्वारा शिक्षण बेहतरीन विकल्प सवित हो सकते हैं. इन्ही बातों को ध्यान में रखते हुए एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखण्ड द्वारा शैक्षिक कार्यक्रमों के प्रसारण के लिए प्रसिद्द "स्वयं प्रभा चैनल" के प्रयोग हेतु राज्यभर के शिक्षकों के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया है. विभिन्न जनपदों में अनेक शिक्षक यह प्रशिक्षण प्राप्त भी कर चुके है. कुछ शिक्षक मित्रों के सुझाव पर में एस.सी.ई.आर.टी. द्वारा आयोजित इस ऑनलाइन प्रशिक्षण की प्रक्रिया को बहुत सरल और संक्षिप्त ढंग से यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ. आशा है जिन शिक्षक साथियों को अभी तक यह प्रक्रिया समझ नहीं आ पा रही थी या बहुत जटिल महसूस हो रही थी उनके लिए मेरा यह प्रयास उपयोगी सावित होगा.

     स्वयं प्रभा क्या है - स्वयं प्रभा 32 DTH चैनलों का एक समूह है जो GSAT-15 उपग्रह का उपयोग करके 24X7 आधार पर उच्च गुणवत्ता वाले शैक्षिक कार्यक्रमों के प्रसारण के लिए समर्पित है। हर दिन, कम से कम चार घंटों के लिए नई सामग्री होगी जो एक दिन में 5 बार दोहराई जाएगी, जिससे छात्रों को अपनी सुविधा का समय चुनने में मदद मिलेगी। कोरोना वायरस के बढ़ते प्रसार की वजह से स्कूलों में  ऑनलाइन क्लासेज चल रही हैं। व्हाट्सएप व नेट के जरिए चल रही क्लासेज कई विद्यार्थियों की पहुँच से बाहर हो रही हैं। ऐसे में उन्हें राहत देने के लिए एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखण्ड ने सभी शिक्षकों और छात्र छात्राओं को स्वयं प्रभा कार्यक्रम से जोड़ने की योजना बनायी है. इस कार्यक्रम तीन चरणों में बांटा गया है. पहले चरण में समस्त शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षण के लिए अपना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना है. रजिस्ट्रेशन हो जाने के बाद दुसरे चरण में प्रशिक्षण मौड्यूल को ध्यानपूर्वक पढना है और मौड्यूल में दिए वीडियोज को देखते हुए DTH Free to home में फ्रीक्वेंसी की सेटिंग की विधा को इस तरह समझना है यह विद्यार्थियों को भी  समझायी जा सके. अंतिम चरण में विद्यार्थियों को स्वयं प्रभा कार्यक्रम की पूरी जानकारी देने और यह सुनिश्चित हो लेने के बाद कि विद्यार्थी स्वयं प्रभा कार्यक्रम से जुड़ चुके हैं, प्रशिक्षण का क्रियान्वयन करने के लिए ऑनलाइन फ़ार्म भरना है. एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखण्ड द्वारा आयोजित स्वयं प्रभा कार्यक्रम के ऑनलाइन प्रशिक्षण को इस प्रकार संपन्न किया जा सकता है.

ऑनलाइन प्रशिक्षण हेतु रजिस्ट्रेशन के लिए यहाँ क्लिक करें - Click Here

प्रशिक्षण के कार्यक्रम का फीडबैक देने के लिए यहाँ क्लिक करें-Click Here

ऑनलाइन प्रशिक्षण के क्रियान्वयन के लिए यहाँ क्लिक कारन- Click Here

यह भी देखें

एस.सी.ई.आर.टी.का प्रशिक्षण मोड्यूल पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें-Click Here

नोट -उपरोक्त link एस.सी.ई.आर.टी. के प्रशिक्षण मोड्यूल से लिए गए हैं.

प्रशिक्षण के लिए रजिस्ट्रेशन कर चुके शिक्षक यहाँ क्लिक करें-   Click Here

सुशील डोभाल, प्रवक्ता अर्थशास्त्र राइका जाखणीधार 
मुझे आशा है की इस पोस्ट के माध्यम से आपने सरलता के साथ स्वयं प्रभा कार्यक्रम का ऑनलाइन प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया होगा. कृपया अपने सुझाव नीचे दिए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य दें.  Comment here


Wednesday, August 26, 2020

अपर शिक्षा निदेशक महावीर सिंह बिष्ट ने NATS कार्यक्रम में छात्रों के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का किया आवाहन।

अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक शिक्षा महावीर सिंह बिष्ट ने समस्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यो, अभिभावकों व आम लोगो से राष्ट्रीय प्रशिक्षुता संवर्धन योजना (NATS) के लिए लाभार्थी छात्र छात्राओं को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया है। कौशल विकास योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा संचालित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रशिक्षुओं की दक्षता को  बढ़ाना है। केंद्र सरकार युवाओं को उनके कार्यक्षेत्र में निशुल्क प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वावलंबी बनाती है और प्रशिक्षण लेने वाले प्रतिभागियों को आठ हजार रुपये प्रतिमाह तक की छात्रवृत्ति भी प्रदान करती है।
राष्ट्रीय प्रशिक्षुता संवर्धन योजना 2020 उन सभी युवाओं और विद्यार्थियों के लिए है जो आईटीआई, फ्रेशर, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना और हाल ही में कक्षा 10 या उससे अगली किसी कक्षा में उत्तीर्ण हुए हैं। गढ़वाल मंडल के अंतर्गत समस्त शासकीय, अशासकीय और निजी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और अभिभावकों को सम्बोधित अपर शिक्षा निदेशक महावीर सिंह बिष्ट ने इस योजना की जानकारी लाभार्थी छात्रों तक पहुंचने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि अपने कौशल में वृद्धि करने के इछुक युवा इस प्रशिक्षण के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कर इस योजना का लाभ ले सकते हैं और दक्षता संवर्धन करते हुए न केवल छात्रवृत्ति और प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकते है बल्कि अपनी पसंद का रोजगार भी प्राप्त कर सकते हैं। भारत सरकार की यह महत्वकांक्षी योजना कौशल संवर्धन के लिए काफी लोकप्रियता हासिल कर रही है, जिससे अब तक हजारों युवा लाभ ले चुके हैं। इस योजना के लिए प्रतिभागी छात्र की आयु 14 से 21 साल के बीच होनी चाहिए। आवेदक के पास आधार नामांकन तथा बैंक में बचत खाता होना अनिवार्य है, साथ ही आवेदक का भारतीय नागरिक होना भी आवश्यक है।

ऑनलाइन आवेदन करने के लिए यहां क्लिक करें- Click Here

Saturday, July 11, 2020

उत्तराखंड राज्य कर्मचारी और पेंशनर्स ऐसे करें अटल आयुष्मान योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन,

सुशील डोभाल 
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने कर्मचारियों और पेंशनरों का गोल्डन कार्ड बनाने के लिए डाटा तैयार कर लिया है। योजना में कर्मचारी व पेंशनर के माता-पिता, 25 वर्ष की आयु के बेटा-बेटीविधवा या  तलाकशुदा पुत्री को भी योजना का लाभ मिलेगा। राज्य कर्मचारी और पेंशनर्स अटल आयुष्मान योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते है. आवेदन के प्रक्रिया को विभिन्न चरणों में यहाँ समझाने का प्रयास कर रहा हूँ. आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपके लिए उपयोगी सावित होगा.
    राजकीय कर्मचारियों के लिए ऑनलाइन आवेदन के प्रक्रिया- कर्मचारी सबसे पहले  Intigrated Financial Management System पर जाएँ और नीचे बायीं और Login CTS पर क्लिक करेंआपकी स्क्रीन पर की नयी विंडो खुलेगी जिस पर निर्धारित स्थान पर आपको अपने कर्मचारी कोड और पासवर्ड और कैप्चा कोड लिखना होगा जिससे आप पोर्टल पर लॉग इन होकर अपने Dashboard पर पहुँच जायेंगे. अब बायीं और My Claim पर क्लिक करें और अंतिम विकल्प  State Government Health Scheme (SGHS)  को क्लिक कर खोलें. यहाँ पर उपलव्ध ऑनलाइन आवेदन पत्र पर कर्मचारी या पेंशनर्स सहित उनके आश्रितों का विवरण भरने के बाद इसे Submit करना होगा. 
     पाठकों की सुविधा के लिए यहाँ ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया के लिए कुछ उपयोगी लिंक पोस्ट कर रहा हूँआशा करता हूँ कि कर्मचारी और पेंशनर्स इन Links को Follow कर आसानी से योजना के लिए आवेदन कर सकेंगे.  में ऑनलाइन आवेदन करने के लिए यहाँ क्लिक करें 
कर्मचारियों और पेंशनर्स द्वारा ऑनलाइन आवेदन के प्रक्रिया यहीं संपन्न हो जाती है. इसके बात कर्मचारियों के ऑनलाइन आवेदन को आहरण वितरण अधिकारी सत्यापित करेंगे और कर्मचारी के अंश की कटौती आरम्भ होने के साथ ही कर्मचारी योजना के लाभ से आच्छादित हो जायेंगे जबकि पेंशनर्स द्वारा किये गए ऑनलाइन आवेदन के विवरण के सम्बंधित कोषाधिकारी द्वारा सत्यापित किया जाना है.
 (IFMS) web portal खोलने के लिए यहाँ क्लिक करें.Click Here
State Government Health Scheme  में ऑनलाइन आवेदन करने के लिए यहाँ क्लिक करें  Click Here
अटल आयुष्मान योजना के लिए अधिकृत वेबसाइट पर जाने के लिए यहाँ क्लिक करें. Click Here
शीघ्र बनेंगे 15 लाख गोल्डन कार्ड, पढने के लिए यहाँ क्लिक करें Click Here
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उत्तराखंड में राजकीय कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके आश्रितों के शीघ्र बनेंगे 15 लाख गोल्डन कार्ड, राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने तैयार किया डाटा.

उत्तराखंड में सरकारी कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके आश्रितों के 15 लाख गोल्डन कार्ड शीघ्र  बनाए जाएंगे। इसके लिए राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने कर्मचारियों और उनके आश्रितों का डाटा तैयार कर लिया है। सेवारत कर्मचारियों के कार्ड विभागीय डीडीओ (आहरण वितरण अधिकारी) और पेंशनरों के कार्ड कोषाधिकारी कार्यालय से बनेंगे।
       राज्य सरकार ने प्रदेश के तीन लाख कर्मचारियों और पेंशनरों को अटल आयुष्मान योजना के अंतर्गत असीमित खर्च तक कैशलेस इलाज की सुविधा दी है। इसमें आईपीडी और ओपीडी इलाज दोनों ही शामिल हैं।
वहीं, कर्मचारियों और पेंशनरों को इलाज कराने के लिए सरकारी अस्पताल से रेफर करने की शर्त नहीं रहेगी। योजना में इलाज के लिए कर्मचारियों और पेंशनरों को प्रति माह के हिसाब से अंशदान की भी कटौती की जनि है. 
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने कर्मचारियों और पेंशनरों का गोल्डन कार्ड बनाने के लिए डाटा तैयार कर लिया है। सभी को मिला कर करीब 15 लाख कार्ड बनाए जाएंगे। योजना में कर्मचारी व पेंशनर के माता-पिता, 25 वर्ष की आयु के बेटा-बेटी, विधवा, तलाकशुदा पुत्री को भी योजना का लाभ मिलेेगा। राज्य अटल आयुष्मान योजना के निदेशक (प्रशासन) डॉ. अभिषेक त्रिपाठी का कहना है कि प्रदेश के सभी राजकीय कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके आश्रितों का डाटा तैयार है। ऐसे में डाटा को योजना में ऑनलाइन अपडेट किया जा रहा है। यह पूरी प्रक्रिया मई माह में संपन्न हो जनी  थी लेकिन कोरोना वायरस के से पैदा हुए हालातों के कारण इसमें बिलम्ब हुआ. राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने अब तैयारिया पूरी कर ली है और योजना का लाभ अब कर्मचारियों और पेंशनर्स को शीघ्र मिलने जा रहा है.
जाने - राज्य कर्मचारी कैसे करें अटल आयुष्मान योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन Click Here

Wednesday, July 8, 2020

शिक्षकों को 31 जुलाई तक स्कूल बुलाने के बजाय घरों से ऑनलाइन पढ़ाने के लिए मानव संशाधन विकास मंत्रालय ने सभी राज्यों को भेजा पत्र।


मानव संसाधन और विकास मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के शिक्षा सचिवों को पत्र लिखकर 31 जुलाई तक स्कूलों और कोचिंग संस्थानों को बंद रखने और शिक्षकों को स्कूल बुलाने के बजाय घर से काम करने के लिए कहा है। पत्र में सरकारी स्कूलों के प्रधानाचार्यों से 50% तक शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को "तत्काल प्रशासनिक कार्य" के लिए स्कूल बुलाने के अपने फैसले पर पुनर्विचार के लिए भी कहा गया है।
  स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग की सचिव अनीता करवाल  द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि "गृह मंत्रालय ने अनलॉक 2 पर दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत यह निर्देश दिया गया है कि स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थान 31 जुलाई, 2020 तक बंद रहेंगे और ऑनलाइन / दूरस्थ शिक्षा की अनुमति जारी रहेगी और इसे प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए शिक्षकों से घरों से ही ऑनलाइन शिक्षण जारी रखा जाय तथा उन्हें स्कूलों, कॉलेजों और शैक्षिक संस्थानों में नहीं बुलाया जाय।
      पत्र में करवाल ने सभी राज्यों  के  शिक्षा विभाग से अनुरोध किया कि वह स्कूलों और कॉलेजों के बंद रखने के आदेशों का अनुपालन और कड़ाई से कार्यान्वयन सुनिश्चित करे और सभी संबंधित अधिकारियों को उनके सख्त कार्यान्वयन के लिए निर्देशित करे। हालांकि उत्तराखंड में ग्रीष्मावकाश 30 जून को खत्म होने पर अधिकांश शिक्षक अपने विद्यालयों में लौट चुके हैं और विभाग के निर्देशों पर इन दिनों हरेला पर्व पर स्कूलों में वृक्षारोपण और स्वच्छता कार्यक्रम संचालित कर रहे हैं। विभाग ग्रीष्मावकाश के बाद सभी शिक्षकों को अपने मुख्यालयों में बने रहने के लिए पूर्व में निर्देशित कर चुका है। मानव संसाधन मंत्रालय की सचिव के पत्र पर राज्य के उच्चाधिकारी क्या निर्णय लेते हैं यह एक दो दिनों में स्पष्ट हो पायेगा।

Sunday, June 28, 2020

कोविड-19 के दौरान और उपरांत स्कूली शिक्षा" पर मुख्य शिक्षा अधिकारी एसपी सेमवाल ने शिक्षकों के साथ कि ऑनलाइन परिचर्चा, दिए अनेक उपयोगी सुझाव।

टिहरी के मुख्य शिक्षा अधिकारी शिव प्रसाद सेमवाल ने कहा है कि मौजूदा दौर में कोरोना वायरस की वैश्विक महामारी ने जहां मानवीय गतिविधियों को ठहरा दिया है वहीं इसने इंशानो  को बहुत कुछ सीखा भी दिया है। इसका सबसे बड़ा बुरा प्रभाव स्कूली बच्चों के सीखने के क्रम पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि स्कूल बंद रहने के कारण इन दिनों अधिकतर शिक्षक ऑनलाइन शिक्षण के माध्यम को अपना रहे हैं किंतु समझना होगा कि सोशल मीडिया पर वीडियो, फोटोग्राफ अथवा कुछ लिखभेज देना ही ऑनलाइन शिक्षण नही है।
     टाटा ट्रस्ट और हिमोत्थान एडुकेशनल ऐंड स्पोर्ट्स संस्था के द्वारा आयोजित "कोविड-19 के दौरान और उपरांत" विषय पर ऑनलाइन परिचर्चा के दौरान बतौर मुख्य वक्ता सीईओ टिहरी गढ़वाल शिव प्रसाद सेमवाल ने कहा कि दिसम्बर 2019 में चीन के वुहान शहर से शुरू हुए कोरोना के कहर ने देखते ही देखते दुनिया के 195 देशों को पूरी तरह अपने प्रभाव में ले लिया। आज कोरोना हमारे सामने एक गम्भीर समस्या है और इसके परिणाम भयावह है। कोरोना पर हम निश्चित ही आने वाले समय मे विजय प्राप्त कर लेंगे किन्तु इसकी भरपाई अगले कई वर्षों तक नही हो पाएगी। उन्होंने मनुष्य और प्रकृति के बीच की अन्तःक्रिया को समझाते हुए कहा कि यह सोचनीय विषय है कि प्रकृति ने कोरोना के माध्यम से केवल मनुष्यों को ही उनकी तमाम गतिविधियों को रोकने को विवश किया हैं जैवमण्डल के अन्य जीवजंतुओं पशु पक्षियों व पेड़पौधों पर इसका कोई भी बुरा प्रभाव नही पड़ा है। 
     उन्होंने कहा कि कोरोना का सबसे बुरा प्रभाव स्कूली बच्चों की शिक्षा दीक्षा पर पड़ रहा है हालांकि अनेक शिक्षक इस दौर में बेहतरीन भूमिका निभा रहे हैं जबकि बड़ी मात्रा में शिक्षक ऑनलाइन टीचिंग के जरिये बच्चों को विषयलाभः दे रहे हैं किन्तु इन दिनों ऑनलाइन शिक्षण का स्वरूप बदल गया है। महज फेसबुक और व्हाट्सएप्प पर पाठ से सम्बंधित वीडियो, फोटो या टेक्स्ट पैराग्राफ लिख भेजना ही ऑनलाइन शिक्षण नही है, लेकिन अधिकतर शिक्षक यही कर रहे हैं। जबकि यह केवल एकतरफा संवाद है और बच्चों का फीडबैक इससे नही मिल पा रहा है। ऑनलाइन शिक्षण तभी सार्थक होगा जब उससे बच्चे की शैक्षिक अभिवृद्धि में कुछ सुधार हो सके।  शैक्षिक वीडियोज बड़ी मात्रा में यूट्यूब सहित स्वयं प्रभा चैनल, दूरदर्शन और दीक्षा चैनल पर भी उपलव्ध हैं। शिक्षकों को मौजूदा हालातों को ध्यान में रखते हुए कुछ अभिनव नवाचारों को शिक्षण में शामिल करना होगा। जूम ऐप पर आयोजित इस ऑनलाइन परिचर्चा में टाटा ट्रस्ट और हिमोत्थान एडुकेशनल एंड स्पोटर्स संस्था से मनीष कुमार झा तथा दुर्गा प्रसाद कंसवाल सहित कई शिक्षक व शिक्षिकाएं शामिल रही।

Friday, June 26, 2020

वैश्विक महामारी के दौर में शिक्षकों, विद्यार्थियों और आमलोगों को हौसला दे रहे हैं अपर निदेशक माध्यमिक, महाबीर सिंह बिष्ट।

वैश्विक महामारी covid-19 के प्रभाव ने जहां आमलोगों को घरों में कैद कर दिया है वही विद्यलयी शिक्षा विभाग के एक अधिकारी सोशल मीडिया सहित विभिन्न माध्यमो से न केवल शिक्षकों, विद्यार्थियों और आम नौजवानों से संवाद कायम कर बदले हालातों के साथ तालमेल बनाते हुए निरन्तर आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहे है। हम बात कर रहे विद्यालयी शिक्षा विभाग में बतौर मंडलीय अपर निदेशक महावीर सिंह बिष्ट की, जो कोरोनाकाल में न सिर्फ शिक्षकों को ऑनलाइन शिक्षण में आधुनिक सूचना तकनीकी का प्रयोग करने के लिए प्रेरित करते रहे हैं बल्कि स्कूली बच्चों के साथ भी सोशल मीडिया के माध्यम से रूबरू होते हैं। रविबार 28 जून को अपर निदेशक बिष्ट चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी और पौड़ी के सैकड़ो शिक्षकों के साथ माइक्रोसॉफ्ट टीम्स ऐप के माध्यम से संवाद कायम करेंगे।
    अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा, गढ़वाल मंडल महावीर सिंह बिष्ट कोरोना वायरस के कारण देशभर में लगाये गए लॉकडाउन के दौरान सोशल मीडिया पर न केवल शिक्षकों को विभिन्न नवाचारों के माध्यम से ऑनलाइन शिक्षण के लिए प्रेरित करते रहे बल्कि स्कूल कॉलेज बन्द रहने पर चिंतित बच्चों और अभिभावकों को बदले हालातों के साथ तालमेल बनाने की प्रेरणा देते रहे हैं। हाल में  भारत-चीन सीमा पर चीन की करतूत पर उन्होंने सोशल मीडिया पर चीन निर्मित सामान के बहिष्कार की मुहिम शुरू की है जिसको हजारों लोगों का समर्थन मिला है।
     सोशल मीडिया पर शिक्षकों को जारी सन्देश में अपर निदेशक श्री बिष्ट ने कहा है कि कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को बुरी तरह प्रभावित किया है और इसके प्रभाव से हमारा न केवल मिलना जुलना बन्द हुआ है बल्कि आपसी बार्तालाप भी सीमित हो गया है। उन्होंने कहा है कि आपस मे संवाद बनाकर हम मौजूदा हालातों से निपटने के लिए नए और बेहतर तरीके निकाल सकते है। उन्होंने माध्यमिक संवर्ग के शिक्षक शिक्षिकाओं को रविवार 28 जून को 4:30 बजे सांय माइक्रोसॉफ्ट टीम्स ऐप के जरिये आपस मे जुड़कर संवाद बनाने का आवाह्न किया है। रविबार को टिहरी, पौड़ी, चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों के शिक्षक इस ऐप के जरिये उनके साथ जुड़ेंगे। श्री बिष्ट ने न केवल डाउनलोड करने के लिए ऐप का लिंक भी शेयर किया है बल्कि तकनीकी सहायता के लिए इन चारों जनपदों के तकनीकी विशेषज्ञों के मोबाइल नम्बर भी सार्वजनिक किए है। 
 माइक्रोसॉफ्ट टीम्स ऐप डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें।  Click Here

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