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Himwant Live News: टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय ने गंगा सागर में लिया हिमालय और गंगा की सुरक्षा का संकल्प, जलवायु परिवर्तन पर फिर व्यक्त की चिंता

Report by- Sudhanshu Dobhal
किशोर उपाध्याय, विधायक टिहरी, उत्तराखण्ड 
टिहरी के विधायक और हिमालय-गंगा बचाओ आंदोलन के प्रणेता किशोर उपाध्याय ने गंगा सागर में हिमालय और गंगा की सुरक्षा, गंगा की अविरलता और निर्मलता का संकल्प लिया है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि हिमालय और गंगा का वजूद खतरे में है और इनका अस्तित्व बचाने के लिए हर संभव प्रयास करने होंगे।
   इस मौके पर उन्होंने कहा है की जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव और तापमान बढ़ने से हिमालय में ग्लेशियर की संख्या घट रही है। गंगा यमुना पर गंभीर संकट बना हुआ है। हिमालयी क्षेत्र में तापमान बढ़ने के कारण ग्लेशियर तेजी के साथ कम हो रहे हैं। इसके चलते गंगा यमुना सहित उत्तर भारत की नदियों में जल आपूर्ति और जलवायु स्थिरता खतरे में है। उन्होंने कहा है की यह बात मिजोरम विश्वविद्यालय आइजोल के प्रोफेसर विशंभर प्रसाद सती और सुरजीत बनर्जी के 30 साल के अध्ययन में सामने आई है। 
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    उन्होंने बताया कि जिस तरह से हिमालय के ग्लेशियर पिघल रहे हैं, उससे आने वाले समय में हिमालय के बर्फ विहीन होने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। जिससे गंगा के अस्तित्व पर भी संकट आ जायेगा। कहा कि हिमालय और गंगा भारत ही नहीं बल्कि विश्व की भी धरोहर है। दोनों पर्यावरण के क्षेत्र में अलग स्थान रखते हैं। लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय की सुरक्षा करने की आवश्यकता है। आम जनमानस को इसके लिए एकत्रित होकर कार्य करना होगा। विधायक ने कहा कि आज भी महाकुंभ प्रयागराज के लिए टिहरी बांध से 200 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, तब जाकर वहां साधु-संत और श्रद्धालु स्नान कर पुण्य अर्जित कर रहे हैं। विधायक ने कहा कि वसंत पंचमी पर उन्होंने गंगा सागर पहुंचकर हिमालय और गंगा की सुरक्षा के लिए संकल्प लिया है। जिसके लिए सभी के सहयोग की जरूरत है।
गंगोत्री, यमुनोत्री और पिंडारी ग्लेशियर को लेकर कहीं यह बात
  विशेष रूप से गंगा और यमुना जैसी महत्वपूर्ण नदियों को पोषित करने वाले ग्लेशियरों के लिए पिछले कुछ दशकों में केंद्रीय हिमालय ने गर्मी में बहुत अधिक वृद्धि देखी है। इससे ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और बर्फ की चादर में कमी हो रही है। गंगोत्री, यमुनोत्री और पिंडारी जैसे ग्लेशियर कमजोर हो रहे हैं। यहां ग्लेशियर पीछे की तरफ हट रहे हैं। साथ ही मोटी परत भी कम हो रही है।
टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय ने टिहरी बांध को लेकर कही यह बात
हिमालय की ऊंची चोटियां हो रही हैं बर्फ विहीन
साल भर बर्फ से लदी रहने वाली हिमालय की ऊंची चोटियों पर बर्फ नहीं है। अध्ययन में सामने आया है कि मोटी बर्फ की चादर में निरंतर कमी आ रही है। 1991 से 2021 तक शिखर पर बर्फ अवधि के दौरान मोटी बर्फ का क्षेत्र 10,768 वर्ग किलोमीटर से घटकर 3,258.6 वर्ग किलोमीटर रह गया है, जो एक खतरनाक कमी का संकेत है।
जल संकट के बन गए हैं आसार
ठीक इसके विपरीत पतली बर्फ की चादर 1991 में 3,798 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 2021 में 6,863.56 वर्ग किलोमीटर हो गई है। इससे क्षेत्र में गर्मी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि औली और उसके आसपास के क्षेत्र जो पहले हमेशा बर्फ से ढके रहते थे। अब वहां बर्फ नहीं है। नैनीताल में बर्फबारी की आवृत्ति कम हुई है। 1990 के दशक में यहां अक्सर बर्फबारी होती रहती थी, लेकिन अब इसकी आवृत्ति दो या तीन वर्षों में एक बार होती है। स्थिति ऐसी ही रही तो आने वाले समय में गंभीर वैश्विक संकट के आसार हैं।
टिहरी बांध के कारण पैदा हुए हालातो पर टिहरी विधायक और हिमालय और गंगा बचाओ आंदोलन के प्रणेता किशोर उपाध्याय ने कहीं  ये बात, देखें वीडियो

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