माननीय उच्चतम न्यायालय में टीईटी (TET) अनिवार्यता को लेकर चल रही रिव्यू पिटीशन (Review Petition) पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा की गुणवत्ता (Quality of Education) से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। सुनवाई के मुख्य बिंदु और कानूनी बहसवरिष्ठ अधिवक्ताओं की उपस्थिति: कोर्ट में विभिन्न पक्षों की ओर से देश के दिग्गज वकील मौजूद रहे। मध्यप्रदेश की ओर से राकेश द्विवेदी, शिक्षकों की ओर से पी.एस. पटवालिया, अभिषेक मनु सिंघवी, मुकुल रोहतगी और नॉर्थ-ईस्ट मेघालय की ओर से सलमान खुर्शीद ने अपनी दलीलें पेश कीं। TSCT की ओर से अधिवक्ता प्रशांत शुक्ला भी कोर्ट में मौजूद रहे। शिक्षा की गुणवत्ता सर्वोपरि: न्यायालय ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि Article 21A के लागू होने के बाद शिक्षा अब केवल एक नीतिगत उद्देश्य नहीं, बल्कि एक मौलिक अधिकार (Fundamental Right) है। बच्चों के भविष्य को देखते हुए क्वालिटी एजुकेशन से समझौता नहीं किया जा सकता। NCTE नोटिफिकेशन पर चर्चा: मुख्य चर्चा NCTE के 2001 के नोटिफिकेशन और 29 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी लागू होने को ले...
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