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भारत एवं विश्व व्यापार

1991 से भारत में बहुत तेज आर्थिक प्रगति हुई है जब से उदारीकरण और आर्थिक सुधार की नीति लागू की गयी है और भारत विश्व की एक आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभरकर आया है। सुधारों से पूर्व मुख्य रूप से भारतीय उद्योगों और व्यापार पर सरकारी नियंत्रण का बोलबाला था और सुधार लागू करने से पूर्व इसका जोरदार विरोध भी हुआ परंतु आर्थिक सुधारों के अच्छे परिणाम सामने आने से विरोध काफी हद तक कम हुआ है।


व्यापार संगठन :-
गैट की स्थापना के बाद बहुराष्ट्रीय व्यापार प्रणाली के विकास के फलस्वरूप 1 जनवरी, 1995 को विश्वव्यापार संगठन की स्थापना हुई। 15 अप्रैल, 1994 को 123 देशों के वाणिज्य मत्रियों ने मराकेश में उरुग्वे दौर में ऑतम अधिनियम पर अपने हस्ताक्षर किए थे। विश्व व्यापार संगठन एक स्थायी संगठन है तथा इसकी स्थापना सदस्य राष्ट्रों की संसदों द्वारा अनुमोदित एक अंतरराष्ट्रीय संधि के आधार पर हुई है।

1947 में विचार-विमर्श करके, गैट 1 जनवरी, 1948 को एक अंतरिम व्यवस्था के रूप में अस्तित्व में आया। मूलतः इसमें 23 हस्ताक्षरकर्ता थे जो उस समय अंतरराष्ट्रीय व्यापार संगठन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देशों संबंधी स्थापित प्रोपेटरी समिति के सदस्य थे

दिसम्बर 1993 में, डि फेक्टो के आधार पर गैट नियमों को 111 हस्ताक्षरित दलों और 22 अन्य देशों ने लागू किया। 15 अप्रैल 1994 को मराकेश (मोरक्को) में 123 देशों के वाणिज्य मंत्रियों द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे। उरुग्वे दौर की वार्ताओं में डंकल प्रस्तावों के अंतर्गत निम्नलिखित क्षेत्रों में समझौते हुए। वे हैं: कृषि, बाजार पहुंच, व्यापार संबंधी बौद्धिक संपदा अधिकार, माल, सेवाओं, व्यापार संबंधी निवेश उपाय, बहुतंतु समझौता और विवाद निपटारण निकाय। बाद में 1 जनवरी, 1995 को विश्व व्यापार संगठन अस्तित्व में आया।


भारत की विदेश व्यापार नीति
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत सरकार की पांच साल (2015 से 2020) की पहली विदेश व्यापार नीति-2015-20 नई दिल्‍ली में 1 अप्रैल 2015 को जारी किया। इस पंचवर्षीय विदेश व्यापार नीति में वस्तुओं एवं सेवाओं का निर्यात बढ़ाने के साथ-साथ रोजगार सृजन करने और प्रधानमंत्री के ‘मेक इन इंडिया’ विजन को ध्यान में रखते हुए देश में मूल्य संवर्द्धन को नई गति प्रदान करने की रूपरेखा का जिक्र किया गया है।

इस नीति में विनिर्माण एवं सेवा दोनों ही क्षेत्रों को समर्थन देने पर ध्यान केन्द्रित किया गया है। वहीं, विदेश व्यापार नीति-2015-20 में ‘कारोबार करने को और आसान बनाने’ पर विशेष जोर दिया गया है।


विदेश व्यापार नीति 2015-2020 के मुख्य बिंदु

विदेश व्यापार नीति (एफटीपी) में कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए उच्चस्तरीय प्रोत्साहन दिया जाएगा।
नीति में सरकार के मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया अभियानों के बीच समन्वय पर जोर दिया गया है
देश का निर्यात बढ़ाने के लिए विदेश व्यापार नीति में एक निर्यात संवर्धन मिशन स्थापित किए जाने पर भी जोर दिया गया है।
यह मिशन निर्यात बढ़ाने के लिए राज्य सरकारों के साथ एक संस्थागत ढांचे का काम करेगा।
विदेश व्यापार नीति में ‘विभिन्न केन्द्र सरकार के विभागों में निर्यात और आयात के प्राधिकृत बिंदुओं पर वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती करने का प्रावधान किया गया है।
विदेश व्यापार नीति की सालाना समीक्षा के बजाय अब पंचवर्षीय नई विदेश व्यापार नीति की ढाई साल में समीक्षा की जाएगी। पहले इसकी हर साल समीक्षा की जाती रही है।
विदेश व्यापार नीति 2015-2020 में वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार बढ़ाने के लिए ‘भारत वस्तु निर्यात योजना (एमईआईएस) और ‘भारत सेवा निर्यात योजना (एसईआईएस)’ शुरू करने की घोषणा की गई।

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