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चंदा कोचर- ‘संघर्ष से शिखर’ और ‘अर्श से फर्श’ तक का सफ़र

चंदा कोचर, आलेख – सुशील डोभाल.
जब भी हम बैंकिंग सेक्टर की ओर देखते हैं तो इस सेक्टर में बड़े पदों पर पुरुषों का ही दबदबा देखा जाता है। लेकिन चंदा कोचर वह नाम है जिन्होंने बैंकिंग सेक्टर में न केवल  पुरुषों के वर्चस्व को तोड़ा है बल्कि  देश और दुनिया में अपनी अद्भुत कार्यशैली से एक अलग पहचान बनार्इ और पहुँच गयी सफलता के शिखर पर। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पद्म भूषण से सम्मानित और फोर्ब्स मैगजीन में विश्व की सौ सबसे प्रभावशाली महिलाओं के सूची में शामिल चंदा कोचर किस तरह बुलंदियों की शिखर पर पहुंची हैं और फिर कैसे एक आरोप ने उन्हें पहुंचा दिया अर्श से फर्श तक? आइए  एक नजर डालते हैं चंदा कोचर के सफरनामे पर.

चंदा कोचर- सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर बनते समय चंदा
 ने  कहा था कि “आसमानों की ख्वाहिश रखोलेकिन धीरे-धीरे
चलते हुए
हर कदम का आनंद उठाओ। ये छोटे-छोटे कदम ही
 हमारे सफर को पूरा करते हैं।“ चंदा को उस वक्त यह अंदाजा
 नहीं रहा होगा कि उनका बैंकिंग सेक्टर में सफर इतने जल्दी
 ख़त्म हो जाएगा और वह ‘अर्श से फर्श’ पर पहुँच जाएँगी।

चंदा कोचर- ‘संघर्ष से शिखर’ और ‘अर्श से फर्श’ तक का सफ़र

आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ रही चंदा कोचर का नाम पिछले कुछ वर्षों में देश की ही नहीं बल्कि दुनिया की सबसे  प्रभावशाली महिलाओं की सूची में शामिल रहा है। मैनेजमेंट ट्रेनी के छोटे से पद से बैंकिंग सेक्टर में अपने करियर की शुरूआत करने वाली चंदा कोचर की सफलता की कहानी अनेक महिलाओं के लिए प्रेरणादायी है और देश की कर्इ महिलाओं को चंदा कोचर के जज्बे और मेहनत से आगे बढ़ने की सीख मिलती है। चंदा का जन्म 17 नवंबर 1961 को राजस्थान के जोधपुर में हुआ और राजस्थान के जयपुर में ही वह बड़ी हुई. उन्होंने जयपुर के सेंट एंजेला सोफिया स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की. 13 वर्ष की आयु में ही उनके पिता की मौत ने उन्हें झकझोर कर रख दिया था लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और इसके बाद मुंबई आ गईं। वहां उन्होंने  जय हिंद कॉलेज से स्नातक की डिग्री ली। 1982 में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने मुंबई के जमनालाल बजाज इंस्टिट्यूट ऑफ बिजनेस स्टडी से मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री ली। खास बात यह रही कि चंदा कोचर को मैनेजमेंट स्टडी में अपने शानदार परफॉर्मेन्स के लिए वोकहार्ड्ट गोल्ड मेडल और कॉस्ट एकाउंटेंसी में सर्वाधिक अंक के लिए जेएन बोस गोल्ड मेडल भी मिला।

चंदा ने अपने करिअर की शुरुआत 1984 में केवल 23 वर्ष की उम्र में आईसीआईसीआई बैंक में मैनेजमेंट ट्रेनी के तौर पर की थी। 1990 के दशक की शुरुआत में आईसीआईसीआई एक कमर्शियल बैंक बन गया. माना जाता है कि आईसीआईसीआई के खुलने में चंदा कोचर की भूमिका काफी अहम रही थी. ग्रुप के तत्कालीन चेयरमैन के. वी. कामत की पसंदीदा रहीं चंदा कोचर की कार्यशैली को देखकर उन्हें 1993 में कोर टीम के लिए एक अहम जिम्मेदारी  सौंपी गई। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1994 में उन्हें अस्सिटेंट जनरल मैनेजर बना दिया गया। इसके बाद ठीक दो साल बाद चंदा को जनरल मैनेजर बनाया गया और बैंक के टॉप 200 क्लाइंट्स का जिम्मा उन्हें सौंप दिया गया. उनकी परफॉर्मेंस को देखते हुए बैंक मैनेजमेंट उन्हें इसतरह लगातार तरक्की देता रहा।

वर्ष 2007 से 2009 तक उन्होंने बैंक के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (सीएफओ) और ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर का पद संभाला। इस दौरान 2008 में वित्तीय संकट के बीच कोचर के दूरदर्शी नेतृत्व ने विपरीत हालातों में आईसीआईसीआई बैंक को आगे बढाया. इसके बाद उन्हें सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया गया। कहा  जाता है कि उनकी तरक्की के कारण उनसे वरिष्ठ  शिखा शर्मा (एक्सिस बैंक की पूर्व प्रमुख) ने भी बैंक छोड़ दिया था. चंदा ने बैंकिंग के क्षेत्र में जो प्रयास किये वह कॉर्पोरेट और आईसीआईसीआई बैंक के रिटेल बैंकिंग व्यवसाय में कामयाब रहे। उनके काम से आईसीआईसीआई बैंक ने खूब तरक्की की और देखते ही देखते बैंक निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा बैंक बन गया. इसी के साथ चंदा भी सफलता की सीढियां चढ़ती गई. इसप्रकार चंदा को बैंक की पूरी कमान दे दी गई और उन्हें कंपनी का एमडी और सीईओ बनाया गया. चंदा का नाम उस दौर में ऐसे बिजनेस महिलाओं में गिना जाने लगा जिसने अपने दम पर किसी निजी बैंक को सरकारी बैंकों के सामने लाकर खड़ा कर दिया.

बैंकिंग के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए चंदा को कई अवॉर्डों से नवाजा गया है.  उनके सराहनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2011 में पद्म भूषण से सम्मानित किया हैं. फोर्ब्स मैगजीन ने 2017 में उन्हें सबसे प्रभावशाली भारतीय महिलाओं के साथ ही विश्व के सौ प्रभावशाली महिलाओं की सूची में शामिल किया था।  उनके नेतृत्व में आईसीआईसीआई बैंक ने 2001, 2003, 2004 और 2005 में बेस्ट रिटेल बैंक इन इंडिया का अवॉर्ड जीता था। इसके साथ ही वे उन दो महिलाओं में एक हैं जो‍ कि इंडियन डॉमेस्टिक बैंक की हेड रही  हैं। चंदा कोचर को वॉशिंगटन में वुडरो विल्सन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार आईसीआईसीआई समूह द्वारा स्थानीय समुदायों में लोगों के जीवन को सुधारने और बड़े पैमाने पर दुनियाभर में सुधार के लिए कोचर को दिया गया है। यही नहीं, उन्हें 2011 में ग्लोबल लीडरशिप अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था।

कोचर मुंबई में रहती है. उन्होंने दीपक कोचर से विवाह किया था, जो विंड एनर्जी के उद्योग से जुड़े है और कभी उनके बिज़नस स्कूल के सहपाठी भी रहे है. उनके  दो बच्चे है एक लड़का अर्जुन और एक बेटी आरती. चंदा कोचर की बेटी आरती कोचर रिलायंस इंडस्ट्रीज में काम करती हैं। उन्होंने अमेरिका से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है। आरती की शादी 2014 में अपने कॉलेज के दिनों के प्रेमी आदित्य काजी के साथ हुयी है. आदित्य का परिवार उद्योगपति अंबानी परिवार का करीबी है। मुकेश अंबानी के चेयरमैन स्टाफ में आदित्य एक मुख्य अधिकारी के रूप में पदस्थ हैं। चंदा के बेटे अर्जुन को स्पोर्ट्स से बेहद लगाव रहा  है। वे स्कूल के कई स्पोर्ट्स इवेंट्स में हिस्सा लेते थे । चंदा कहती थीं कि वह काम में व्यस्त होने के बावजूद अर्जुन के स्पोर्ट्स इवेंट्स देखने जाती हैं। उनके बेटे अर्जुन ने अपनी स्कूली शिक्षा मुंबई के द कैथेडल और जॉन कॉनन स्कूल से पूरी करने के बाद  येल यूनिवर्सिटी से अपनी अंडर ग्रेजुएशन पूरी की है. येल यूनिवर्सिटी की वेबसाइट के मुताविक अर्जुन भारत के शीर्ष जूनियर खिलाडियों में से एक रहे हैं. 2023 में एक बिजनेस परिवार कि लड़की संजना से अर्जुन के शादी स्थगित होने के ख़बरें उस वक्त सुर्ख़ियों में आई जब चंदा कोचर को अपने पति के साथ वित्तीय गड़बड़ियों के मामले में गिरफ्तार होना पड़ा.

2009 में बैंक की सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर बनने के वक्त उन्होंने कहा था कि आसमानों की ख्वाहिश रखो, लेकिन धीरे-धीरे चलते हुए, हर कदम का आनंद उठाओ। ये छोटे-छोटे कदम ही हमारे सफर को पूरा करते हैं। चंदा को उस वक्त यह अंदाजा नहीं रहा होगा कि उनका बैंकिंग सेक्टर में सफर इतने जल्दी ख़त्म हो जाएगा और वह ‘अर्श से फर्श’ पर पहुँच जाएँगी। लोन केस में नाम आने के बाद उन्हें अपने पद से अक्टूबर 2018 में इस्तीफा देना पड़ा था। वीडियोकॉन लोन केस मामले में सीबीआई ने चंदा कोचर और उनके पति दीपक कोचर के खिलाफ मामला दर्ज किया और उन्हें 23 दिसंबर 2022 को  गिरफ्तारकर लिया गया. हालांकि 9 जनबरी 2023 में उन्हें जमानत मिली.  बॉम्बे हाईकोर्ट ने 6 फ़रवरी 2024 में जांच एजेंसी सीबीआई को इस मामले में फटकार भी लगायी और उनकी गरफ्तारी को गैरकानूनी करार दिया.

चंदा बहुत ही तेजी से तरक्की की सीढियां चढ़ रही थी लेकिन 2016 में पहली बार चंदा कोचर पर वीडियोकॉन को गलत तरीके से लोन मुहैया करवाने को लेकर उंगलिया उठनी शुरू हुई.  दरअसल वीडियोकॉन को आईसीआईसीआई बैंक ने साल 2012 में कुल 40 हजार करोड़ के लोन में से 3,250 करोड़ रुपए का लोन मुहैया कराया था. चंदा पर आरोप लगा कि उन्होंने अपनी पति दीपक कोचर और उनके दो साथियों के साथ मिलकर गलत तरीके से कंपनी को वित्तीय फायदा पहुंचाया. वह कंपनी जिसका नाम न्यूपावर रीन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड था उसे दीपक कोचर और उनके दो साथियों ने मिलकर बनाया था. इस आरोप के बाद चंदा के बुरे दिन शुरू हुए और देखते ही देखते बिजनेस वर्ल्ड की एक करिश्माई महिला का पतन शुरू हो गया और करीब 34 साल बाद तमाम आरोपों और कानूनी पेंचों के बाद चंदा की आईसीआईसीआई बैंक से अक्टूबर 2018 में विदाई हो गई. 

संदर्भ सूची-
दैनिक भाष्कर,
tv9hindi.com,
patrika.com,
News18.com,
jivani.org
Picture-     facebook.com
Picture Background- https://stock.adobe.com/


लेखक का परिचय
पूरा नाम-                      सुशील प्रकाश डोभाल, प्रवक्ता अर्थशास्त्र
व्यवसाय-                      पत्रकारिता, अध्यापन और लेखन
कार्यालय-                      अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज जाखणीधार, टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड
विभाग-                         विद्यालयी शिक्षा विभाग , उत्तराखंड
शैक्षिक योग्यताएं-         एमए, बीएड, प्रत्रकारिता एवं जनसंचार और विधिशास्त्र में स्नातकोत्तर
मोबाईल -                     9412920543
E-mail-                        sushildobhal2@gmail.com
web portal                  http://www.himwantlive.com/
स्थाई पता-                    बी-9 सैक्टर-3, मॉडल हॉउस नियर यूको बैंक, नई टिहरी, टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड. 249001
अनुभव-                         राजकीय सेवा से पूर्व क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर के दैनिक समाचार पत्रों में मान्यता प्राप्त पत्रकार के रूप में 8 वर्षों का कार्यानुभव, वर्तमान समय में विद्यालयी शिक्षा विभाग उत्तराखंड में प्रवक्ता अर्थशास्त्र के पद पर कार्यरत रहने के साथ ही शिक्षकों और शिक्षार्थियों के लिए समर्पित वेब पोर्टल “हिमवंत” का विगत 10 वर्षों से संपादन.
लेखक की घोषणा
मै सुशील डोभाल यह घोषणा करता हूँ कि मेरा यह आलेख  (चंदा कोचर- ‘संघर्ष से शिखर’ और ‘अर्श से फर्श’ तक का सफ़र) मौलिक एवं अप्रकाशित है। इस आलेख में मैंने जिन संदर्भ श्रोतों का सहयोग लिया हैं, उन्हें विधिवत उद्धृत कर दिया है। इस आलेख में व्यक्त विचारों से मेरी सहमति है। इनसे संपादक, प्रबंधक या प्रकाशक का कोई सरोकार नहीं है। मैं संपादक एवं प्रकाशक को इस आलेख के प्रकाशन की सहमति देता हूँ। पत्रिका के लेखों को यदि भविष्य में पुस्तक रूप में प्रकाशित किया जाता है तो मेरे इस आलेख को पुस्तक के अध्याय के रूप में भी प्रकाशन की मै अनुमति देता हूँ।
 
दिनांक- 26 मार्च 2024
स्थान- नई टिहरी, उत्तराखंड
                                                                                                      

                                                                                                      सुशील प्रकाश डोभाल,
                                                                                                 बी-9 सैक्टर-3, मॉडल हॉउस
                                                                                          नियर यूको बैंक, नई टिहरी, टिहरी गढ़वाल
                                                                                              उत्तराखंड. 249001

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