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सुप्रीम निर्णय: शिक्षक कर लें दो साल के भीतर TET क्वालीफाई, वरना छोड़नी होगी नौकरी,

Sushil Dobhal 
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि शिक्षकों को सेवा में बने रहने या प्रमोशन के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) पास करना जरूरी है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने कहा कि जिन शिक्षकों की नौकरी 5 साल से ज्यादा बची है, वे सभी इस नियम के दायरे में होंगे। ऐसे सभी शिक्षकों को टीईटी पास करने के लिए दो साल का वक्त दिया गया है। TET पास न करने वालों को या तो नौकरी छोड़नी होगी या फिर कंपल्सरी रिटायरमेंट CRS लेना होगा।
  बेंच ने उन टीचर्स को राहत दी है, जिनकी सर्विस 5 साल बची है। लेकिन, इन्हें भी प्रमोशन चाहिए तो टीईटी पास करना होगा। शीर्ष कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए ये निर्देश दिए। इससे पहले नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजूकेशन (एनसीटीई) ने शिक्षकों को TET क्वालिफाई करने के लिए 5 साल का समय दिया था, जिसे बाद में 4 साल और बढ़ाया गया। एनसीटीई के इस नोटिस के खिलाफ उम्मीदवारों ने कोर्ट का रुख किया था।
   दरअसल कुछ राज्यों में एनसीटीई के नोटिफिकेशन की अनदेखी करते हुए TET पास न करने पर भी शिक्षकों को प्रोन्नति दी जा रही थी। तभी मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। उस वक्त कोर्ट कई सिविल अपीलों पर सुनवाई कर रहा था। इनमें ये सवाल भी शामिल थे- क्या 29 जुलाई, 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों, जिनके पास अनुभव है, उन्हें पदोन्नति के लिए टीईटी करना है? दूसरा क्या अल्पसंख्यक संस्थानों को टीईटी पास करने पर जोर दे सकते हैं?

अब अल्पसंख्यक संस्थानों पर बड़ी बेंच करेगी फैसला
कोर्ट ने कहा कि यह निर्देश माइनॉरिटी इंस्टीट्यूशंस पर अभी लागू नहीं होगा। इसका फैसला बड़ी बेंच करेगी। बेंच ने सुनवाई के दौरान इस संबंध में 2014 के फैसले में अल्पसंख्यक स्कूलों को आरटीई से बाहर रखने के फैसले पर सवाल भी उठाया। कोर्ट ने कहा कि इससे समान और समावेशी शिक्षा की सोच को नुकसान पहुंचा है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की रिपोर्ट समेत कई दस्तावेजों से यह साफ है कि अल्पसंख्यक स्कूलों को आरटीई से छूट देने से कई स्कूल इस कानून से बचने के लिए खुद को अल्पसंख्यक घोषित कर रहे हैं। इससे बच्चों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

चार अहम सवाल बड़ी बेंच के सामने रखे गए
  1. क्या 2014 के फैसले में अल्पसंख्यक स्कूलों को आरटीई से छूट देने पर दोबारा विचार हो?
  2. क्या आरटीई अल्पसंख्यकों के अधिकारों का उल्लंघन करता है? और क्या धारा 12 (1) (सी) को इस तरह पढ़ा जाना चाहिए कि वह कमजोर वर्ग के उन्हीं बच्चों पर लागू हो जो अल्पसंख्यक हों?
  3. क्या 2014 के फैसले में संविधान के अनुच्छेद 29 (2) पर विचार न करना गलत था?
  4. क्या धारा 12 (1) (सी) को असंवैधानिक मानने के बावजूद पूरे आरटीई को अल्पसंख्यकों के हक के खिलाफ घोषित करना सही था ?
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