Skip to main content

Translate करें.

Shri Devyaparadha Kshamapana Stotram: श्री देव्यापराध क्षमापन स्तोत्रं ॥ श्री दुर्गा चालीसा


मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि।
यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे॥ 
अर्थ:
"हे सुरेश्वरी! मेरी इस पूजा में न तो सही मंत्र हैं और न ही शास्त्रोक्त क्रिया (विधि)। यहाँ तक कि मेरे मन में सच्ची भक्ति का भी अभाव है। फिर भी, हे देवी! अपनी सामर्थ्य के अनुसार मैंने जो भी पूजा की है, कृपया उसे अपनी कृपा से पूर्ण करें।"

माँ दुर्गा की पूजा समाप्ति पर करें ये स्तुति, तथा पूजा में हुई त्रुटि के अपराध से मुक्ति पाएँ।

श्री देव्यापराध क्षमापन स्तोत्रं ॥

न मन्त्रं नो यन्त्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो
न चाह्वानं ध्यानं तदपि च न जाने स्तुतिकथा: ।
न जाने मुद्रास्ते तदपि च न जाने विलपनं
परं जाने मातस्त्वदनुसरणं क्लेशहरणम् ॥ 1 ॥

विधेरज्ञानेन द्रविणविरहेणालसतया
विधेयाशक्यत्वात्तव चरणयोर्या च्युतिरभूत् ।
तदेतत्क्षन्तव्यं जननि सकलोद्धारिणि शिवे
कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति ॥ 2 ॥

पृथिव्यां पुत्रास्ते जननि बहव: सन्ति सरला:
परं तेषां मध्ये विरलतरलोSहं तव सुत: ।
मदीयोSयं त्याग: समुचितमिदं नो तव शिवे
कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति ॥ 3 ॥

जगन्मातर्मातस्तव चरणसेवा न रचिता
न वा दत्तं देवि द्रविणमपि भूयस्तव मया ।
तथापि त्वं स्नेहं मयि निरुपमं यत्प्रकुरुषे
कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति ॥ 4 ॥

परित्यक्ता देवा विविधविधिसेवाकुलतया
मया पंचाशीतेरधिकमपनीते तु वयसि ।
इदानीं चेन्मातस्तव यदि कृपा नापि भविता
निरालम्बो लम्बोदरजननि कं यामि शरणम् ॥ 5 ॥

श्वपाको जल्पाको भवति मधुपाकोपमगिरा
निरातंको रंको विहरति चिरं कोटिकनकै: ।
तवापर्णे कर्णे विशति मनुवर्णे फलमिदं
जन: को जानीते जननि जपनीयं जपविधौ ॥ 6 ॥

चिताभस्मालेपो गरलमशनं दिक्पटधरो
जटाधारी कण्ठे भुजगपतिहारी पशुपति: ।
कपाली भूतेशो भजति जगदीशैकपदवीं
भवानि त्वत्पाणिग्रहणपरिपाटीफलमिदम् ॥ 7 ॥

न मोक्षस्याकाड़्क्षा भवविभववाण्छापि च न मे
न विज्ञानापेक्षा शशिमुखि सुखेच्छापि न पुन: ।
अतस्त्वां संयाचे जननि जननं यातु मम वै
मृडानी रुद्राणी शिव शिव भवानीति जपत: ॥ 8 ॥

नाराधितासि विधिना विविधोपचारै:
किं रुक्षचिन्तनपरैर्न कृतं वचोभि: ।
श्यामे त्वमेव यदि किंचन मय्यनाथे
धत्से कृपामुचितमम्ब परं तवैव ॥ 9 ॥

आपत्सु मग्न: स्मरणं त्वदीयं
करोमि दुर्गे करुणार्णवेशि ।
नैतच्छठत्वं मम भावयेथा:
क्षुधातृषार्ता जननीं स्मरन्ति ॥ 10 ॥

जगदम्ब विचित्रमत्र किं
परिपूर्णा करुणास्ति चेन्मयि ।
अपराधपरम्परावृतं
न हि माता समुपेक्षते सुतम् ॥ 11 ॥

मत्सम: पातकी नास्ति
पापघ्नी त्वत्समा न हि ।
एवं ज्ञात्वा महादेवि
यथा योग्यं तथा कुरु ॥ 12 ॥

इति श्रीमच्छंकराचार्यकृतं देव्यपराधक्षमापनस्तोत्रम्

Read more...


बजरंग बाण और हनुमान चालीसा


 श्री देव्यापराध क्षमापन स्तोत्रं ॥


श्री दुर्गा चालीसा


नमो नमो दुर्गे सुख करनी ।

नमो नमो अंबे दुःख हरनी ॥ 1 ॥


निरंकार है ज्योति तुम्हारी ।

तिहू लोक फैली उजियारी ॥ 2 ॥


शशि ललाट मुख महाविशाला ।

नेत्र लाल भृकुटि विकराला ॥ 3 ॥


रूप मातु को अधिक सुहावे ।

दरश करत जन अति सुख पावे ॥ 4 ॥


तुम संसार शक्ति लय कीना ।

पालन हेतु अन्न धन दीना ॥ 5 ॥


अन्नपूर्णा हुयि जग पाला ।

तुम ही आदि सुंदरी बाला ॥ 6 ॥


प्रलयकाल सब नाशन हारी ।

तुम गौरी शिव शंकर प्यारी ॥ 7 ॥


शिव योगी तुम्हरे गुण गावेम् ।

ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावेम् ॥ 8 ॥


रूप सरस्वती का तुम धारा ।

दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा ॥ 9 ॥


धरा रूप नरसिंह को अंबा ।

परगट भयि फाड के खंबा ॥ 10 ॥


रक्षा कर प्रह्लाद बचायो ।

हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो ॥ 11 ॥


लक्ष्मी रूप धरो जग माहीम् ।

श्री नारायण अंग समाहीम् ॥ 12 ॥


क्षीरसिंधु में करत विलासा ।

दयासिंधु दीजै मन आसा ॥ 13 ॥


हिंगलाज में तुम्हीं भवानी ।

महिमा अमित न जात बखानी ॥ 14 ॥


मातंगी धूमावति माता ।

भुवनेश्वरी बगला सुखदाता ॥ 15 ॥


श्री भैरव तारा जग तारिणी ।

छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी ॥ 16 ॥


केहरि वाहन सोह भवानी ।

लांगुर वीर चलत अगवानी ॥ 17 ॥


कर में खप्पर खडग विराजे ।

जाको देख काल डर भाजे ॥ 18 ॥


तोहे कर में अस्त्र त्रिशूला ।

जाते उठत शत्रु हिय शूला ॥ 19 ॥


नगरकोटि में तुम्हीं विराजत ।

तिहुँ लोक में डंका बाजत ॥ 20 ॥


शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे ।

रक्तबीज शंखन संहारे ॥ 21 ॥


महिषासुर नृप अति अभिमानी ।

जेहि अघ भार मही अकुलानी ॥ 22 ॥


रूप कराल कालिका धारा ।

सेन सहित तुम तिहि संहारा ॥ 23 ॥


पडी भीढ संतन पर जब जब ।

भयि सहाय मातु तुम तब तब ॥ 24 ॥


अमरपुरी अरु बासव लोका ।

तब महिमा सब कहें अशोका ॥ 25 ॥


ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी ।

तुम्हें सदा पूजें नर नारी ॥ 26 ॥


प्रेम भक्ति से जो यश गावेम् ।

दुःख दारिद्र निकट नहिं आवेम् ॥ 27 ॥


ध्यावे तुम्हें जो नर मन लायि ।

जन्म मरण ते सौं छुट जायि ॥ 28 ॥


जोगी सुर मुनि कहत पुकारी ।

योग न होयि बिन शक्ति तुम्हारी ॥ 29 ॥


शंकर आचारज तप कीनो ।

काम अरु क्रोध जीत सब लीनो ॥ 30 ॥


निशिदिन ध्यान धरो शंकर को ।

काहु काल नहिं सुमिरो तुमको ॥ 31 ॥


शक्ति रूप को मरम न पायो ।

शक्ति गयी तब मन पछतायो ॥ 32 ॥


शरणागत हुयि कीर्ति बखानी ।

जय जय जय जगदंब भवानी ॥ 33 ॥


भयि प्रसन्न आदि जगदंबा ।

दयि शक्ति नहिं कीन विलंबा ॥ 34 ॥


मोको मातु कष्ट अति घेरो ।

तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो ॥ 35 ॥


आशा तृष्णा निपट सतावेम् ।

रिपु मूरख मॊहि अति दर पावैम् ॥ 36 ॥


शत्रु नाश कीजै महारानी ।

सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी ॥ 37 ॥


करो कृपा हे मातु दयाला ।

ऋद्धि-सिद्धि दे करहु निहाला । 38 ॥


जब लगि जियू दया फल पावू ।

तुम्हरो यश मैं सदा सुनावू ॥ 39 ॥


दुर्गा चालीसा जो गावै ।

सब सुख भोग परमपद पावै ॥ 40 ॥

॥दोहा॥
शरणागत रक्षा करे,
भक्त रहे नि:शंक ।
मैं आया तेरी शरण में,
मातु लिजिये अंक ॥

॥ इति श्री दुर्गा चालीसा संपूर्ण ॥

श्री दुर्गा चालीसा के साथ-साथ माता की आरती आरती: जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी अथवा आरती: अम्बे तू है जगदम्बे काली अवश्य करें। तथा महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् एवं माता के भजन का गायन भी किया जा सकता है।


श्री काली चालीसा


काली चालीसा जो पढ़हीम् ।

स्वर्गलोक बिनु बंधन चढ़हीम् ॥


दया दृष्टि हेरौ जगदंबा ।

केहि कारणमां कियौ विलंबा ॥


करहु मातु भक्तन रखवाली ।

जयति जयति काली कंकाली ॥


सेवक दीन अनाथ अनारी।

भक्तिभाव युति शरण तुम्हारी ॥


दोहा

प्रेम सहित जो करे, काली चालीसा पाठ ।

तिनकी पूरन कामना, होय सकल जग ठाठ ॥

बजरंग बाण और हनुमान चालीसा


 श्री देव्यापराध क्षमापन स्तोत्रं ॥


शिव रुद्राष्टकम लिरिक्स और अर्थ सहित


Comments

Popular posts from this blog

School prayer: स्कूल के लिए 20 प्रसिद्ध प्रार्थना, जो बना देंगी विद्यार्थियों का जीवन सफल

भारतीय संस्कृति में प्रार्थना का अहम स्थान हैं। प्रत्येक कार्य के आरंभ में ईश्वर से उस कार्य की सिद्धि हेतु हम सभी प्रार्थना करते हैं। प्रार्थना के बाद ही सभी कार्य आरंभ किये जाते हैं. बच्चें भी जब विद्या अध्ययन के लिए विद्यालय जाते है तो पठन पाठन से पूर्व वे प्रार्थना सभा में ईश्वर से प्रार्थना करते हैं। प्रार्थना से मन व ह्रदय को मजबूती तो मिलती ही है साथ ही यह संसार के रचयिता परम शक्ति सम्पन्न ईश्वर को धन्यवाद अर्पित कर कृतज्ञता प्रकट करने का भी एक माध्यम है। ईश्वर की प्रार्थना से ही मन स्थिर होता है। जिसके कारण बच्चे पढाई मे ज्यादा ध्यान लगा पाते है। सुबह की प्रर्थना आपके पूरे दिन को सकारत्मक बनाती है, ऐसा माना जाता है कि प्रार्थना किसी ‘महान शक्ति’ से सम्बन्ध जोड़ने का एक उचित माध्यम है।    इस लेख मे हम भारत के अधिकांश विद्यालयो मे आयोजित होने वाली इन 20 प्रार्थनाओं पर नजर डालेंगे। स्कूलों के लिए प्रर्थना का यह संकलन आपको कैसा लगा, कृपया कमेंट बॉक्स में अपने सुझाव अवश्य कमेंट करें।

Pariksha Pe Charcha 2024: PM Modi जनवरी में करेंगे परीक्षा पे चर्चा, आप भी हो सकते हैं शामिल, यहां करना होगा PPC 2024 के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन

Pariksha Pe Charcha 2024 Pariksha Pe Charcha 2024: देशभर के छात्रों अभिभावकों और शिक्षकों को प्रधानमंत्री मोदी के साथ परीक्षा पे चर्चा में शामिल होने का शानदार मौका मिलने वाला है जी हां, पिछले वर्ष की भांति Board Exam 2024 से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिर से छात्रों के साथ ‘परीक्षा पे चर्चा’ करेंगे। छात्रों से ही नहीं PM Modi अभिभावकों और शिक्षकों से भी बातें करेंगे। पीएम मोदी के बहुचर्चित कार्यक्रम परीक्षा पे चर्चा के 7वें संस्करण के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 11 दिसंबर 2023 से शुरू हो चुकी है.    अगर आप इसमें हिस्सा लेना चाहते हैं, तो आपको PPC 2024 के लिए 12 जनवरी 2024 तक ऑनलाइन रजिस्टर करना होगा। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रॉसेस भारत सरकार की वेबसाइट mygov.in पर शुरू हो चुकी है। इस कार्यक्रम में कक्षा 9 से 12वीं तक के विद्यार्थी, उनके अभिभावक और शिक्षकों को भी PM Modi से बात करने, और सुझाव लेने का मौका मिलेगा। आइए हिमवंत के इस लेख के द्वारा समझने का प्रयास करते हैं की Pariksha Pe Charcha  यानी PPC 2024 में आप कैसे हो सकते हैं शामिल? Vivo Ignite Award 2023: वीवो इग्न...

NEP 2020: FLN क्या है और इसके क्या उद्देश्य हैं? यहां पढ़ें।

भारत सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पेश की है जिसमें FLN नामक एक कार्यक्रम शामिल है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य 3 से 8 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को भाषा और गणित की शिक्षा प्रदान करना है।  एफएलएन मिशन भारत के सभी राज्यों में शुरू किया जा रहा है और इसका लक्ष्य 2025-26 तक छोटे बच्चों के समग्र विकास में मदद करना है। यह मिशन नई शिक्षा नीति की स्किल इंडिया यानी निपुण भारत पहल का हिस्सा है।   FLN मिशन क्या है? FLN भारत सरकार की नई शिक्षा निति का एक हिस्सा है| इसे निपुण योजना के अंतर्गत लागु किया गया है और इसमें 3 वर्ष से लेकर ९ वर्ष के बच्चों का समग्र विकास करना है| FLN का उद्देश्य क्या है? FLN का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे खेल, कहानियों, तुकबंदी, गतिविधियों, स्थानीय कला, शिल्प और संगीत के माध्यम से आनंदपूर्ण तरीके से सीखें और आजीवन सीखने के लिए मजबूत नींव विकसित करें।  FLN मिशन का कार्य है बच्चो को अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा देना है| बच्चो के skill Development के ऊपर काम करना इसका उद्देश्य है| उच्च गुणवत्ता वाले technical सामान से बच्चो को उनके संस्कृति और ...

Followers

Himwant readers