डायट नई टिहरी में तीन दिवसीय IRISE कार्यशाला का आयोजन, नवाचार और प्रयोग आधारित शिक्षण से विकसित होगा विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण : दीपक रतूड़ी
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) नई टिहरी में 11 से 13 अगस्त तक आयोजित होने वाली तीन दिवसीय IRISE कार्यशाला का शुभारंभ मंगलवार को डायट प्राचार्य श्री दीपक रतूड़ी, तथा कार्यक्रम समन्वयक डॉ. मनवीर नेगी, द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर डायट प्राचार्य श्री दीपक रतूड़ी ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों में नवाचार, जिज्ञासा, रचनात्मकता एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना आवश्यक है।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के परिप्रेक्ष्य में शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में नवीन तकनीकों गतिविधि आधारित शिक्षण एवं प्रयोगों को शामिल करने पर विशेष जोर दिया। साथ ही अपेक्षा की कि प्रयोग और गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थी विषय-वस्तु को बेहतर ढंग से समझते हुए उसे अपने दैनिक जीवन से भी जोडें । कार्यक्रम समन्वयक डॉ. मनवीर नेगी ने प्रतिभागियों को IRISE कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा एवं उद्देश्यों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि IRISE कार्यक्रम का संचालन IISER Pune दवारा किया जा रहा है। इस पहल से इस कार्यक्रम में Department of Science and Technology (DST), टाटा ट्रस्ट, टाटा टेक्नोलॉजीज, ब्रिटिश काउंसिल तथा रॉयल सोसायटी ऑफ केमिस्ट्री जैसी प्रतिष्ठित संस्थाएं भी जुड़ी हुई हैं। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों के माध्यम से विदयार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार एवं समस्या समाधान की क्षमता को विकसित करना है।
कार्यशाला के प्रथम दिवस प्रतिभागियों को Mathematical Connections, Chemistry Around Us, Ecosystem एवं Reflection Session जैसे विषयों पर गतिविधि एवं प्रयोग आधारित प्रशिक्षण दिया गया। वहीं दवितीय दिवस Magnetism and Electromagnetism, Food, Height and Distance तथा Separation Techniques विषयों पर प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। प्रशिक्षण के दौरान IRISE से संदर्भ व्यक्ति श्री अक्षय कुलकर्णी श्री विनोद बडोनी एवं सुश्री हेमवती गुसाईं द्वारा विभिन्न गतिविधियों, प्रयोगों एवं सहभागिता आधारित विधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विज्ञान एवं गणित जैसे विषयों को केवल सैद्धांतिक रूप से पढ़ाने के बजाय गतिविधियों, प्रयोगों और दैनिक जीवन के उदाहरणों से जोड़कर अधिक रोचक, सरल एवं प्रभावी बनाना है।
कार्यशाला में 65 प्रतिभागियो के द्वारा विभिन्न गतिविधियों एवं प्रयोगों में सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने अनुभव साझा किए गए। इस अवसर पर डायट के वरिष्ठ संकाय सदस्य श्री देवेंद्र सिंह भण्डारी, श्री विनोद पेटवाल श्री संजीव भट्ट एवं श्रीमती सरिता असवाल उपस्थित रहे । तीन दिवसीय यह कार्यशाला शिक्षकों को आधुनिक एवं नवाचारपरक शिक्षण पद्धतियों से परिचित कराने के साथ-साथ कक्षा-कक्ष में अनुभवात्मक एवं प्रयोग आधारित अधिगम को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है।



Comments
Post a Comment
पोस्ट पर अपने उपयोगी विचार और सुझाव यहाँ कमेंट करें।