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अतिथि शिक्षकों के पदों को रिक्त न मानने के निर्णय पर राजकीय शिक्षकों में उबाल, सभी जनपदों में शुरू हुआ जबरदस्त विरोध।

 

अतिथि शिक्षकों के पदों को रिक्त न  दिखाये जाने के निर्णय पर राजकीय  शिक्षको में जबरदस्त नाराजगी व्याप्त हो गयी है। शिक्षक संघ से जुड़े पदाधिकारियों एवं आम शिक्षकों ने सरकार के इस निर्णय को राजकीय शिक्षकों के साथ छलावा करार दिया है। राज्य के सभी जनपदों से सरकार के इस निर्णय का विरोध शुरू हो गया है।

गत दिवस अतिथि शिक्षकों के पदों को रिक्त न मानने के कैबिनेट के निर्णय की खबर मीडिया में आने के बाद राजकीय शिक्षक संघ से जुड़े पदाधिकारियों और आम शिक्षकों में उबाल आ गया है। राज्य के सभी जनपदों के शिक्षक नेताओं ने सरकार के इस निर्णय का जबरदस्त विरोध शुरू कर दिया है। चुनाव से ठीक पहले अतिथि शिक्षकों के पदों को रिक्त न मानने के फैसले पर सवाल उठने भी लाजमी हैं। अतिथि शिक्षकों के नियुक्ति पत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि उनकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के 14 जनवरी 2020 के आदेशों के अधीन रहेगी और इन पदों पर स्थाई नियुक्ति और पदोन्नति होने पर अतिथि शिक्षकों के पद स्वत ही समाप्त हो जाएंगे। राजकीय शिक्षक संघ से जुड़े शिक्षक नेताओं का कहना है कि सरकार का यह निर्णय वर्षो से विभाग में सेवा दे रहे शिक्षकों के हितों के विरुद्ध है। एक ओर वर्षों से राजकीय शिक्षक स्थानांतरण एवं पदोन्नति की उम्मीद में दुर्गम क्षेत्रों में तैनात हैं जबकि सरकार ने अतिथि शिक्षकों को अनेक सुगम विद्यालय में नियुक्तियां दी है और अब उनके पदों को रिक्त न मानने का निर्णय लिया जा रहा है। 

       राजकीय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल किशोर डिमरी, महामंत्री सोहन सिंह माजिला, उपाध्यक्ष मुकेश प्रसाद बहुगुणा सहित दोनों मंडलों एवं सभी जनपदों की कार्यकारिणी ने इस निर्णय का विरोध किया है। राजकीय शिक्षक संघ टिहरी गढ़वाल के अध्यक्ष श्याम सिर्फ सरियाल ने कहा है कि सरकार के इस निर्णय से शिक्षकों के कई हित प्रभावित होंगे। यदि सरकार अतिथि शिक्षकों के पदों को रिक्त नहीं दिखाती तो प्रवक्ता पदों पर पदोन्नति बाधित होगी। सेवा अवधि में न्यूनतम 3 पदोन्नति की मांग करने वाले शिक्षकों के साथ ऐसा निर्णय सरकार द्वारा जानबूझ कर लिया गया है ताकि पदोन्नति की प्रक्रिया में अड़ंगा लग सके। उन्होंने कहा कि यदि सरकार की शिक्षकों के पदों को भरने की मंशा होती तो सबसे निचले स्तर पर नियुक्तियां करते और प्रतिवर्ष शिक्षकों को पदोन्नति  के अवसर देते। राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय प्रवक्ता प्रकाश सिंह चौहान ने कहा है अतिथि शिक्षकों के पदों को रिक्त न माममे का फैसला अगर सरकार लेती है तो शिक्षक संघ उसका  विरोध करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार का यह निर्णय वर्षों से विभाग में सेवा दे रहे शिक्षकों के हित के साथ अन्याय है। जानकारों का कहना है कि यदि सरकार अपना निर्णय वापस नही लेती तो राजकीय शिक्षकों की नाराजगी का आगामी विधानसभा चुनाव में भी व्यापक असर दिखना स्वाभाविक है।

समस्त शिक्षक साथी अतिथि शिक्षकों के पदों को रिक्त न मानने के निर्णय पर आपका संक्षिप्त वक्तव्य नीचे कमेंट बॉक्स में अवश्य कमेंट करें।- सुशील डोभाल, संपादक 'हिमवंत'

Comments

  1. बहुत अनुचित निर्णय,,शिक्षक वर्षों से दुर्गम में हैं उनको स्थानांतरण का अवसर नहीं और अतिथि सुगम में।। वाह

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  2. इस निर्णय से सरकार को निष्चित ही पछताना पड़ेगा इसी प्रकार के निरभय कांग्रेस सरकार ने भी लिए थे

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  3. इस सरकार ने राजकीय शिक्षक संघ उत्तराखंड को पूरी तरह दरकिनार किया है। क्या इनकी नैय्या 2022 में इन्हीं के सहारे पार लगने वाली है। या आभास हो गया है कि....... । देखते हैं क्या परिणाम आता है 2022 में।

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  4. सरकार का यह फैसला अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है
    जो शिक्षक पिछले 20-25 सालों से दुर्गम अति दुर्गम क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं सरकार का अबके साथ यह एक भद्दा मजाक है

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  5. गेस्ट का विरोध बार बार सही नही है बार- बार

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  6. यह एक मुद्दे को भटकाने वाली नीति है
    कमजोर और जयचंद नेताओं के भरोसे ही यह सब हो रहा है

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  7. इसे कहते हैं आ बैल मुझे मार या अपने पैरों पर अपने आप कुल्हाड़ी मारना, अधिक अतिथि प्रेम रावत जी की सरकार लेकर डूबा था, और अब एक ओर की पटकथा भी शायद लिखी जा चुकी है। अगर वो अपना निर्णय कर चुके हैं तो हमें भी अपना निर्णय करना ही होगा

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  8. अपने चेहतों को पिछले दरवाजे से भेजने का यह तरीका सही नहीं है कांग्रेस की तरह चालाकी व अति आत्मविश्वास समय आने पर धोखा दे सकता है

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  9. gest ka birodh karna thik nhi h m pichle 15 barso se durgam m hu jo huwa h sahi h

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  10. ये सरासर सरकार की हठधर्मिता के कारण लिया गया तानाशाही फैसला है जिसका हर एक शक्षक घोर विरोध प्रकट करता है आखिर सरकार का अपना फैसला वापस लेना ही होगा अन्यथा आगामी चुनाव में गम्भीर परिणाम मिलेंगे

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  11. सरकार ने सही निर्णय लिया है और साथ ही PGT भर्ती में 50% LT को लेना गलत है

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  12. Sarkar ka Gas teacher ke sath Dhokha hai 6 Sal se guest teacher kam vetan mein Durga Sthan ka Seva de rahe hain isliye guest teacher roco teacher banana chahie sirf mandey per galti se ruko samayojit karna uchit Nahin Hai Kyunki Unki qualification teacher ke barabar hain

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  13. सरासर गलत निणय -जिस व्यक्ति ने बीस बाइस साल दुर्गम में सेवा दी , अब पद्दोन्नति पर सुगम आ सकता था ,उसके सारे रास्ते बंद नकली ट्रांसफर एक्ट भी केवल केवल नियमित पर लागू होगा, गेस्ट चहेते अब सुगम में कुंडली मार बैठे है, जब तक पक्के नही होंगे पड़ भर रहेगा ,वे एक्ट में भी नही आएंगे, सालों साल दुर्गम में बैठा बीमार व्यक्ति निराशा में गुजर जाएगा, वाह।
    क्या कहें जब नीति नियंता राष्ट्रनिर्माता को सिर्फ बैक डोर भर्ती का साधन समझ ले तो पतन तय है,भविष्य की पीढ़ी कैसे संवरेगी।

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  14. बहुत गलत निर्णय

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