Census 2027: वन अनुसंधान संस्थान के साइंटिस्ट्स हॉस्टल में सम्पन्न हुआ मास्टर ट्रेनर्स का चार दिवसीय प्रशिक्षण, जनगणना के दूसरे चरण की जानी प्रक्रिया
Himwant Live:
उत्तराखंड में जनगणना के दूसरे चरण के सफल एवं सुचारू संचालन के लिए मास्टर ट्रेनर्स का चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हो गया है। जनगणना निदेशालय ने यह प्रशिक्षण पांच से आठ अक्तूबर तक वन अनुसंधान संस्थान के साइंटिस्ट्स हॉस्टल में कराया है।
प्रशिक्षण के अंतिम दिन प्रतिभागियों को जनगणना कार्य की व्यावहारिक एवं मैदानी जानकारी देने के लिए फील्ड विजिट कराया गया। इस दौरान मास्टर ट्रेनर्स ने जनसंख्या गणना की कार्यप्रणाली, विभिन्न परिस्थितियों में कार्य संपादन और मैदानी स्तर पर आने वाली संभावित चुनौतियों की व्यावहारिक समझ हासिल की। फील्ड विजिट के बाद एक विशेष सत्र में प्रतिभागियों के अनुभव व सुझाव लिए गए और उनकी शंकाओं का समाधान किया गया। समापन सत्र में निदेशक जनगणना इवा आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि जनगणना के दूसरे चरण के सफल संचालन में मास्टर ट्रेनर्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने मास्टर ट्रेनर्स का आह्वान किया कि वे प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान का उपयोग कर आगामी चरणों में गणना कार्मिकों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दें और आंकड़ों की शुद्धता, एकरूपता एवं निर्धारित नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।
समारोह के अंत में निदेशक इवा श्रीवास्तव और संयुक्त निदेशक व राष्ट्रीय प्रशिक्षक शैलेंद्र सिंह नेगी ने सभी मास्टर ट्रेनर्स को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर मास्टर ट्रेनर्स ने पूरी निष्ठा और समन्वय के साथ दायित्व निभाने का संकल्प लिया।
जनगणना की प्रक्रिया
द्वितीय चरण की इस जनगणना में 16 नवंबर से 30 नवंबर तक स्वजनगणना अर्थात सेल्फ एन्यूमरेशन का विकल्प निवासियों के पास उपलब्ध रहेगा। जिसके माध्यम से नागरिक अपनी स्वयं की गणना कर सकते हैं तथा दिनांक 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक प्रगणक घर-घर जाकर जनगणना संबंधी जानकारी निवासीगणों से एकत्रित करेंगे तथा बेघरों की गणना 5 जनवरी की रात्रि 00:00 समय में की जाएगी। 5 जनवरी 2027 से 9 जनवरी 2027 तक रिवीजन राउंड चलेगा। जनगणना कार्य से पूर्व समस्त कार्यों के भली भांति संचालन व सकुशल संपादन हेतु प्रगणकों तथा सुपरवाइजर को गन्ना उत्पादक महाविद्यालय में पूर्ण प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
डिजिटल माध्यम से जनगणना
जनगणना 2027 पहली बार पूर्ण रूप से डिजिटल माध्यम से की जाएगी। प्रशिक्षण में यह स्पष्ट किया गया कि फील्ड दौरे के दौरान यदि प्रगणक अथवा पर्यवेक्षक द्वारा किसी ऐसे छूटे हुए क्षेत्र, मकान के समूह अथवा परिवार की पहचान की जाती है, जिसका एचएलओ चरण के दौरान कवरेज नहीं किया गया था, तब इसकी सूचना तत्काल चार्ज अधिकारी के संज्ञान में लाई जाएगी। ऐसे प्रत्येक चिन्हित छूटे हुए क्षेत्र मकान अथवा परिवार को जनसंख्या की गणना चरण के दौरान अनिवार्य रूप से कवर किया जाना संबंधित प्रगणक एवं पर्यवेक्षक अर्थात सुपरवाइजर का उत्तरदायित्व होगा।
कवरेज की सुनिश्चितता
किसी भी चिन्हित क्षेत्र, मकान अथवा परिवार को बिना कवरेज के नहीं छोड़ा जाएगा इसके साथ ही जनसंख्या की गणना के दौरान प्रत्येक भौगोलिक क्षेत्र चाहे वह आबाद हो, निर्जन हो, प्रतिबंधित हो, दूरस्थ हो, गतिशील हो या नया विकसित हुआ हो- उसमें उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति का पूर्ण कवरेज सुनिश्चित किया जाएगा। प्रगणक यह भी सुनिश्चित करेंगे कि उनके भाग में कोई जनसंख्या जनगणना से छूटी न हो और न ही किसी क्षेत्र या जनसंख्या की दोहरी गणना हो। द्वितीय चरण की इस जनगणना में प्रत्येक व्यक्ति की सामान्य जानकारी के साथ-साथ, वैवाहिक स्थिति, जाति साक्षरता एवं डिजिटल साक्षरता की स्थिति, प्राप्त शिक्षा के उच्चतम स्तर, आर्थिक कार्यकलाप, मातृभाषा व अन्य भाषाओं के ज्ञान तथा शैक्षणिक संस्थान में शिक्षा ग्रहण की स्थिति जैसे महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे जाएंगे।
कानूनी दायित्व
अधिनियम की धारा 8 के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति जनगणना अधिकारी द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देने के लिए बाध्य है। धारा 9 के अनुसार प्रत्येक मकान स्वामी या अधिभोगी को जनगणना कार्य के लिए जनगणना अधिकारी को प्रवेश की अनुमति देनी होगी। धारा 15 सभी व्यक्तिगत जनगणना अभिलेखों की गोपनीयता सुनिश्चित करती है तथा धारा 11 में प्रश्नों का उत्तर देने से इनकार करने गलत जानकारी देने या जनगणना कार्य में बाधा डालने पर दंड का भी प्रावधान है।

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