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सहायक अध्यापकों को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, प्रवक्ताओं पर भी फैसला, आखिर वरिष्टता विवाद हुआ खत्म,

Himwant Educational News
सहायक अध्यापकों को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, प्रवक्ताओं पर भी फैसला, आखिर वरिष्टता विवाद हुआ खत्म, हाईकोर्ट ने कहा दशकों पुराने और सुप्रीम कोर्ट से तय हो चुके इस मुद्दे को अब दोबारा नहीं खोला जा सकता है.
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य में 1 अक्टूबर 1990 से पहले तदर्थ आधार पर नियुक्त किए गए प्रवक्ताओं और सहायक अध्यापकों (एलटी ग्रेड) के नियमितीकरण और वरिष्ठता से जुड़ी राज्य सरकार व अन्य पक्षों की सभी रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने साफ किया कि इन शिक्षकों को 1 अक्टूबर 1990 से ही नियमितीकरण और वरिष्ठता का लाभ दिया जाएगा, क्योंकि यह कानूनी विवाद पहले ही सुप्रीम कोर्ट तक से तय हो चुका है.

​यह पूरा कानूनी विवाद उत्तराखंड लोक सेवा अधिकरण (ट्रिब्यूनल) के 21 अप्रैल 2022 के उस आदेश के खिलाफ प्रेमलता बौड़ाई व अन्य द्वारा दायर याचिकाओं से जुड़ा था, जिसमें ट्रिब्यूनल ने शिक्षा सचिव के 13 जुलाई 2021 के एक आदेश को पलट दिया था. दरअसल, शिक्षा सचिव ने तदर्थ शिक्षकों के 1 अक्टूबर 1990 से वरिष्ठता के दावों को खारिज कर दिया था, जिसे ट्रिब्यूनल ने अवैध माना और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वे 'भुवन चंद्र कांडपाल' मामले में आए न्यायिक फैसले के आलोक में इन शिक्षकों की आपसी वरिष्ठता का नए सिरे से निर्धारण करें.

​हाईकोर्ट ने मामले के इतिहास का जिक्र करते हुए बताया कि वर्ष 1990 में नियुक्त एक तदर्थ शिक्षक भुवन चंद्र कांडपाल के मामले में एकल पीठ ने 21 नवंबर 1995 के सरकारी शासनादेश के आधार पर उन्हें 1 अक्टूबर 1990 से नियमित मानने का आदेश दिया था. इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने भी वर्ष 2011 में सही ठहराया था. इसके बाद, वर्ष 2019 में 'त्रिविक्रम सिंह कुंवर' मामले में हाईकोर्ट की एक अन्य खंडपीठ ने भुवन चंद्र कांडपाल मामले के निर्णय को 'जजमेंट इन रेम' (यानी सभी समान परिस्थितियों वाले कर्मचारियों पर लागू होने वाला फैसला) घोषित किया था.

​अदालत की कार्यवाही के दौरान यह तथ्य रिकॉर्ड पर आया कि हाईकोर्ट द्वारा समय-समय पर दिए गए अंतरिम निर्देशों का पालन करते हुए शिक्षा विभाग पहले ही नवंबर 2025 में संशोधित वरिष्ठता सूची जारी कर चुका है. इसके तहत, गढ़वाल मंडल के 268 और कुमाऊं मंडल के 259 सहायक अध्यापकों (एलटी ग्रेड) के साथ-साथ प्रदेश भर के कुल 418 प्रवक्ताओं की सेवाओं को 1 अक्टूबर 1990 से नियमित मानते हुए उनकी वरिष्ठता को उसी तिथि से संशोधित कर दिया गया है.

​राज्य सरकार द्वारा कोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद खंडपीठ ने माना कि अब इस मामले में कोई और विवाद शेष नहीं रह जाता है. कोर्ट ने कुछ निजी याचिकाकर्ताओं प्रेमलता बौड़ाई व अन्य की उस दलील को भी सिरे से खारिज कर दिया जिसमें 1995 के शासनादेश को नियमितीकरण नियमावली के खिलाफ बताया जा रहा था. अदालत ने कहा दशकों पुराने और सुप्रीम कोर्ट से तय हो चुके इस मुद्दे को अब दोबारा नहीं खोला जा सकता है. इस आधार पर कोर्ट ने सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं.

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